मणिपुर : यूएनएलएफ-पी उग्रवादियों को अनधिकृत कैंप से हटाया गया
मणिपुर : यूएनएलएफ-पी उग्रवादियों को अनधिकृत कैंप से हटाया गया
इंफाल, एक जुलाई (भाषा) मणिपुर के इंफाल वेस्ट जिले में एक अनधिकृत कैंप में रह रहे प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन के कई सदस्यों को बुधवार को एक निर्धारित कैंप में स्थानांतरित कर दिया गया।
अधिकारियों ने बताया कि इंफाल वेस्ट जिले के फायेंग में एक अनधिकृत कैंप में रह रही ‘यूनाइटेड नेशनल लिबरेशन फ्रंट-पाम्बेई’ (यूएनएलएफ-पी) की 294वीं बटालियन को दूसरी जगह भेज दिया गया है।
हालांकि, अधिकारियों ने निर्धारित कैंप में भेजे गए उग्रवादियों की संख्या नहीं बताई, लेकिन स्थानीय लोगों ने दावा किया कि अनधिकृत कैंप में यूएनएलएफ-पी के लगभग 100 सदस्य रह रहे थे।
यूएनएलएफ-पी इंफाल घाटी में मौजूद मेइती समुदाय का सबसे पुराना सशस्त्र समूह है, जिसने 2023 में केंद्र सरकार के साथ एक शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। हालांकि, जबरन वसूली और हथियारों की बिक्री सहित अन्य आपराधिक गतिविधियों में कथित संलिप्तता के चलते संगठन के सदस्यों को उसके बाद भी गिरफ्तार किया गया है।
अधिकारियों के मुताबिक, फायेंग में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 10वीं भारतीय रिजर्व बटालियन और 5वीं मणिपुर राइफल्स समेत अन्य राज्य बलों के जवानों को वहां भेजा गया है।
मणिपुर में जातीय हिंसा भड़कने के बाद 2023 में फायेंग में कैंप बनाया गया था। 2023 और 2024 में फायेंग (मेइती बहुल) और कांगपोकपी (कुकी जो समुदाय बहुल जिला) के उग्रवादियों के बीच गोलीबारी की कई घटनाएं हुईं, जिनमें दोनों पक्षों के कई लोग मारे गए और कई अन्य घायल हुए।
फायेंग से पहले मंगलवार को इंफाल ईस्ट जिले के नोंगशुम में यूएनएलएफ-पी के 80 सदस्यों को एक अनधिकृत कैंप से हटा दिया गया था।
हालांकि, यूएनएलएफ-पी उग्रवादियों को किस स्थान पर भेजा गया है, इसकी जानकारी नहीं दी गई है। संगठन का काकचिंग जिले के काकचिंग खुनौ में कम से कम एक निर्धारित कैंप है।
इस बीच, फायेंग और आसपास के इलाकों के कई लोगों ने यूएनएलएफ-पी के सदस्यों को हटाए जाने को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यूएनएलएफ-पी कैंप की मौजूदगी से उन्हें सुरक्षा और आत्मविश्वास का एहसास होता था।
स्थानीय लोगों ने पहले अधिकारियों से अपील की थी कि वे इलाके में सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम सुनिश्चित करने के लिए फायेंग में यूएनएलएफ-पी कैंप के संचालन को मंजूरी दें।
भाषा पारुल रंजन
रंजन

Facebook


