वैवाहिक दुष्कर्म मामला: आरोपी पति को बरी करने का फैसला बरकरार
वैवाहिक दुष्कर्म मामला: आरोपी पति को बरी करने का फैसला बरकरार
नयी दिल्ली, एक अप्रैल (भाषा) दिल्ली की एक सत्र अदालत ने घरेलू क्रूरता और वैवाहिक दुष्कर्म के एक मामले में आरोपी पति को बरी करने के मजिस्ट्रेट अदालत के फैसले को बरकरार रखा है।
सत्र अदालत ने कहा है कि क्रूरता का आरोप “अस्पष्ट एवं सामान्य” हैं, जबकि बलात्कार के आरोप में एक अन्य मामले में शिकायतकर्ता के अपने बयान से अंतर्विरोध झलकता है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पुरुषोत्तम पाठक ने एक मजिस्ट्रेट अदालत के चार नवंबर 2023 के आदेश के खिलाफ दायर आपराधिक पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई के दौरान यह फैसला सुनाया।
न्यायाधीश पाठक ने आरोपी को भारतीय न्याय संहिता (भादंसं) की धाराओं– 377 (अप्राकृतिक यौन अपराध), 498ए (पति द्वारा पत्नी के प्रति क्रूरता) और 406 (आपराधिक विश्वासघात) के तहत लगाए गए सभी आरोपों से बरी कर दिया।
अभियोजन पक्ष के अनुसार शिकायकर्ता की 2017 में आरोपी करण से शादी हुई थी ।
शिकायतकर्ता ने अपने ससुरालवालों पर नौ जुलाई 2017 को उसके साथ मारपीट करने का आरोप लगाया था। उसने दावा किया था कि उसके पति ने 10 जुलाई 2017 को उसके साथ जबरन और अप्राकृतिक शारीरिक संबंध बनाए।
अदालत ने 13 मार्च को पारित आदेश में कहा, “इसमें कोई संदेह नहीं है कि भादंसं की धाराओं 377,498A, 406 के तहत कथित अपराध प्रतिवादी/आरोपी करण पर लागू नहीं होते हैं, जो शिकायतकर्ता का पति है। तदनुसार चार नवंबर 2023 के आदेश में कोई भी खामी नहीं है और इसे बरकरार रखा जाता है।”
अदालत ने भादंसं की धारा 377 के तहत लगाए गए आरोपों को ‘सोची-समझी साजिश’ करार दिया। अदालत ने इस संबंध में घरेलू हिंसा मामले में जिरह के दौरान शिकायतकर्ता द्वारा दिये गये बयान का हवाला दिया। आठ मार्च, 2022 को घरेलू हिंसा के मामले को खारिज कर दिया गया था।
तब महिला ने कहा था, ‘‘करण ने मेरी सहमति के बिना कभी भी मेरे साथ जबरन यौन संबंध बनाने की कोशिश नहीं की।’’
भाषा पारुल राजकुमार
राजकुमार

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