स्वतंत्रता सेनानियों की शहादत एक सच्चाई है, आधिकारिक रिकॉर्ड से तय नहीं होता: सरकार
स्वतंत्रता सेनानियों की शहादत एक सच्चाई है, आधिकारिक रिकॉर्ड से तय नहीं होता: सरकार
नयी दिल्ली, 24 मार्च (भाषा) स्वतंत्रता संग्राम के दौरान भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु सहित स्वतंत्रता सेनानियों की ‘‘शहादत एक तथ्य’ है और यह आधिकारिक रिकॉर्ड से तय नहीं होता है।
सरकार ने मंगलवार को एक लिखित प्रश्न के उत्तर में लोकसभा को इस बारे में सूचित किया।
सवाल किया गया था कि क्या यह सच है कि कई स्वतंत्रता सेनानियों को अभी तक ‘‘शहीद’’ का दर्जा नहीं दिया गया है?
इसके जवाब में गृह राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार ने कहा कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम में अमूल्य योगदान इस चर्चा का एक अभिन्न हिस्सा है।
उन्होंने कहा, ‘‘भारतीय इतिहास में उनके नाम हमेशा सुनहरे शब्दों में लिखे जाएंगे।’’
मंत्री ने कहा, ‘‘सरकार और पूरा देश स्वतंत्रता संग्राम के दौरान उनके अमूल्य योगदान को स्वीकार करता है।’’
उन्होंने कहा, ‘संस्कृति मंत्रालय द्वारा प्रकाशित ‘1857 से 1947 तक भारत के स्वतंत्रता संग्राम के शहीदों का शब्दकोश’ में भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु समेत इन सभी स्वतंत्रता सेनानियों के नाम दर्ज हैं। इस पर भारत सरकार की स्थिति 1947 से अपरिवर्तित बनी हुई है।’
उन्होंने कहा, ‘स्वतंत्रता के सर्वोच्च राष्ट्रीय उद्देश्य में उनकी शहादत एक तथ्य है और यह आधिकारिक रिकॉर्ड की अनुमानित उपस्थिति या अनुपस्थिति पर निर्भर नहीं है। उनका कद इस संबंध में दिए गए किसी भी पुरस्कार या उपाधि या स्थिति से कहीं ऊपर है।’
मंत्री ने कहा कि राष्ट्र हमेशा भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु का ऋणी रहेगा, जिन्होंने भारत के बेहतर भविष्य के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी।
भाषा हक हक वैभव
वैभव

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