Naxalite Paparao Surrenders: बस्तर का आखिरी बड़ा नक्सली पापाराव का सरेंडर, 17 साथियों के साथ किया आत्मसमर्पण, इन बड़ी घटनाओं को दिया था अंजाम

बस्तर का आखिरी बड़ा नक्सली पापाराव का सरेंडर, 17 साथियों के साथ किया आत्मसमर्पण, Naxalite Paparao Surrenders in Bijapur

Naxalite Paparao Surrenders: बस्तर का आखिरी बड़ा नक्सली पापाराव का सरेंडर, 17 साथियों के साथ किया आत्मसमर्पण, इन बड़ी घटनाओं को दिया था अंजाम
Modified Date: March 24, 2026 / 04:37 pm IST
Published Date: March 24, 2026 4:37 pm IST

बीजापुर। छत्तीसगढ़ सहित पूरे देश से नक्सलवाद के खात्मे को लेकर अब अंतिम लड़ाई जारी है। नक्सलवाद के खात्मे की डेडलाइन से महज कुछ ही दिन पहले नक्सली लीडर पापा राव ने अपने 17 साथियों के साथ सरेंडर कर दिया है। सभी ने कुटरू थाना पहुंचकर आत्मसमर्पण किया। लंबे समय से सक्रिय पापा राव संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा था। उसके साथ बड़ी संख्या में नक्सलियों का सरेंडर होना सुरक्षा बलों के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

पापा राव का नाम बस्तर के जंगलों में दहशत का पर्याय रहा है। पिछले दो दशकों से वह माओवादी संगठन की वेस्ट बस्तर डिवीजन की कमान संभाल रहा था। हिडमा के मारे जाने के बाद वह क्षेत्र का सबसे अनुभवी और खतरनाक कमांडर बन गया था। 25 लाख रुपये का इनाम होने के बावजूद वह सुरक्षा बलों की कई घेराबंदियों से बच निकला। अब जब उसके सरेंडर की खबर आई है तो बस्तर के आदिवासी इलाकों में राहत की लहर दौड़ गई है। स्थानीय लोग कह रहे हैं कि अगर पापा राव मुख्यधारा में आ गया तो नक्सलवाद की आखिरी कड़ी भी टूट जाएगी। यह खबर इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि केंद्र सरकार ने मार्च 2026 तक बस्तर को नक्सल मुक्त करने का लक्ष्य रखा है। पापा राव के मामले में सुरक्षा बलों की सफलता पूरे अभियान की सबसे बड़ी कामयाबी होगी। 2025-26 में बस्तर में अब तक सैकड़ों नक्सली हथियार छोड़ चुके हैं। पापा राव का मामला अंतिम बड़ा कदम माना जा रहा है।

पापा राव का पूरा नाम और बैकग्राउंड क्‍या है?

पापा राव का असली नाम मंगू दादा या चंद्रन्ना है। वह सुकमा जिले के निमलगुड़ा गांव का रहने वाला है। 50 वर्ष से अधिक उम्र का यह नक्सली 1990 के दशक से माओवादी आंदोलन से जुड़ा हुआ है। वह वेस्ट बस्तर डिवीजन कमेटी का प्रमुख कमांडर है और कई बड़े हमलों की योजना बनाने का आरोप है।

इन्हें भी पढ़ेंः-


लेखक के बारे में

सवाल आपका है.. पत्रकारिता के माध्यम से जनसरोकारों और आप से जुड़े मुद्दों को सीधे सरकार के संज्ञान में लाना मेरा ध्येय है। विभिन्न मीडिया संस्थानों में 10 साल का अनुभव मुझे इस काम के लिए और प्रेरित करता है। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रानिक मीडिया और भाषा विज्ञान में ली हुई स्नातकोत्तर की दोनों डिग्रियां अपने कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ने के लिए गति देती है।