खसरे का प्रकोप और बच्चों और किशोरों में प्रतिरक्षा अंतराल चिंता का विषय: डब्ल्यूएचओ
खसरे का प्रकोप और बच्चों और किशोरों में प्रतिरक्षा अंतराल चिंता का विषय: डब्ल्यूएचओ
नयी दिल्ली, 24 सितंबर (भाषा) स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों के टीकाकरण की दुनिया में सबसे बेहतर दर होने के बावजूद विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) का दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र बच्चों और किशोरों में प्रतिरक्षा अंतराल के कारण खसरे व टीकों से रोकी जा सकने वाली अन्य बीमारियों के प्रकोप का सामना कर रहा है।
इस मुद्दे पर दिल्ली में आयोजित डब्ल्यूएचओ दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्रीय टीकाकरण तकनीकी सलाहकार समूह (एसईएआर आईटीएजी) की 17वीं बैठक में चर्चा की गई। बैठक में करीब 120 विशेषज्ञों, सदस्य देशों के प्रतिनिधियों और अन्य हितधारकों ने हिस्सा लिया।
डब्ल्यूएचओ दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र के प्रभारी अधिकारी डॉ. निलेश बुद्ध ने प्रतिरक्षा अंतराल की पहचान करने और उसे दूर करने के लिए निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने और स्थानीय आंकड़ों के इस्तेमाल को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया।
डॉ. निलेश बुद्ध ने (एसईएआर आईटीएजी) के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा, ‘ प्रगति को आत्मसंतुष्टि में नहीं बदलना चाहिए। टीकाकरण की उच्च दर को बनाए रखने के लिए मजबूत निगरानी, स्थानीय आंकड़ों का समय पर उपयोग और कार्यक्रमों की गहन समीक्षा जरूरी है। हमें प्रतिरक्षा की कमियों को दूर करना होगा, निगरानी व्यवस्था को मजबूत करना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि हर बच्चे और हर समुदाय तक जीवन रक्षक टीके पहुंचें।’
एसईएआर आईटीएजी के अध्यक्ष प्रोफेसर राकेश अग्रवाल ने कहा कि केवल राष्ट्रीय स्तर पर टीकाकरण कवरेज के आंकड़ों से दूरदराज के इलाके में रहने वाले समुदायों की कमियों का पता नहीं चल सकता।
उन्होंने कहा कि लक्षित टीकाकरण अभियान चलाने और कमजोर वर्गों तक टीके पहुंचाने के लिए स्थानीय आंकड़ों और महामारी संबंधी साक्ष्यों का इस्तेमाल जरूरी है।
डब्ल्यूएचओ के अनुसार, इस क्षेत्र में 2025 में नियमित डिप्थीरिया, टेटनस और काली खांसी (डीटीपी3) टीके की तीसरी खुराक की कवरेज 94 प्रतिशत रही, जो दुनिया में सबसे अधिक है।
क्षेत्र में 2021 के बाद से टीके की कोई खुराक नहीं लेने (जीरो-डोज) वाले बच्चों की संख्या में 65 प्रतिशत की कमी आई है। वहीं, टीका नहीं लेने वाले या कम टीकाकरण वाले बच्चों की संख्या 2019 में अनुमानित 45 लाख से घटकर 2025 में 20 लाख रह गई।
डब्ल्यूएचओ के अनुसार, खसरा विशेष चिंता का विषय बना हुआ है क्योंकि बड़े बच्चों और किशोरों में प्रतिरक्षा अंतराल के कारण संक्रमण फैल रहा है और इसके प्रकोप सामने आ रहे हैं।
यह क्षेत्र खसरा उन्मूलन के अपने लक्ष्य की राह में भी पीछे रह गया है। इसके 10 सदस्य देशों में से केवल चार देश ही खसरा उन्मूलन हासिल कर पाए हैं। इसके मुकाबले, सात सदस्य देशों ने रूबेला उन्मूलन का लक्ष्य प्राप्त कर लिया है।
बुधवार से शुरू हुई तीन दिवसीय बैठक में सतत टीकाकरण वित्तपोषण, स्वास्थ्य कर्मियों की क्षमता, निगरानी और प्रयोगशाला प्रणालियों, टीकाकरण सूचना प्रणालियों, टीके को लेकर झिझक और भ्रामक सूचनाओं जैसे मुद्दों पर भी चर्चा की जा रही है।
भाषा
शुभम पवनेश
पवनेश

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