जनसांख्यिकी बदलाव को लेकर गठित उच्च स्तरीय समिति के सदस्यों ने अमित शाह से मुलाकात की

जनसांख्यिकी बदलाव को लेकर गठित उच्च स्तरीय समिति के सदस्यों ने अमित शाह से मुलाकात की

जनसांख्यिकी बदलाव को लेकर गठित उच्च स्तरीय समिति के सदस्यों ने अमित शाह से मुलाकात की
Modified Date: July 1, 2026 / 06:21 pm IST
Published Date: July 1, 2026 6:21 pm IST

नयी दिल्ली, एक जुलाई (भाषा) जनसांख्यिकीय बदलाव के विषय पर गठित उच्च-स्तरीय समिति के सदस्यों ने बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

एक आधिकारिक बयान के मुताबिक न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) प्रकाश प्रभाकर नावलेकर की अध्यक्षता वाली समिति ने गृह मंत्री को बताया कि वह जमीनी स्तर की जानकारी सीधे हासिल करने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का दौरा शुरू करेगी।

बयान में कहा गया कि समिति के सदस्यों ने केंद्रीय गृहमंत्री को बताया कि दौरों को ज्यादा सार्थक और संवादात्मक बनाने के लिए राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों से पहले ही आवश्यक जानकारी प्राप्त करने के उद्देश्य से एक विस्तृत प्रश्नावली तैयार की गई है।

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने इस रणनीति की सराहना करते हुए गृह सचिव गोविंद मोहन को निर्देश दिया कि वह समिति को उसके रोजमर्रा के कामकाज के साथ-साथ राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों के दौरों के दौरान हर संभव सहायता प्रदान करें।

केंद्रीय गृह मंत्री ने सुझाव दिया कि उच्च-स्तरीय समिति यथाशीघ्र अपनी सिफारिशें दे।

बयान के मुताबिक, ‘‘प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 15 अगस्त, 2025 को उच्च अधिकार प्राप्त जनसांख्यिकी मिशन की घोषणा की थी। भारत सरकार ने अवैध आव्रजन और अन्य असामान्य कारणों से होने वाले जनसांख्यिकीय बदलावों का अध्ययन करने और उनसे निपटने के उपाय सुझाने के लिए एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया है।’

इसमें कहा गया है कि समिति में जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण के अलावा भारतीय प्रशासनिक सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी दुर्गा शंकर मिश्रा, भारतीय पुलिस सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी बालाजी श्रीवास्तव और प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद की सदस्य शमिका रवि भी शामिल हैं।

बयान के मुताबिक, ‘‘यह उच्च-स्तरीय समिति देश के विभिन्न हिस्सों में अवैध आव्रजन और अन्य असामान्य कारणों से हो रहे जनसांख्यिकीय बदलावों का वैज्ञानिक रूप से आकलन करेगी, उनके कारणों का विश्लेषण करेगी और उचित नीतिगत, विधायी तथा प्रशासनिक उपायों की सिफारिश करेगी।’’

भाषा धीरज प्रशांत

प्रशांत


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