उच्च शैक्षणिक डिग्री मात्र से ही उम्मीदवार सरकारी नौकरी के लिए पात्र नहीं हो जाता : न्यायालय
उच्च शैक्षणिक डिग्री मात्र से ही उम्मीदवार सरकारी नौकरी के लिए पात्र नहीं हो जाता : न्यायालय
नयी दिल्ली, 20 अप्रैल (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि कोई उम्मीदवार भर्ती और पदोन्नति नियमों के तहत आवश्यक अनुभव को पूरा किए बिना केवल उच्च शैक्षणिक डिग्री होने से ही “योग्य या पात्र” नहीं हो जाता है।
न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी और न्यायमूर्ति ए.एस. चंदुरकर की पीठ ने हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड द्वारा कंप्यूटर हार्डवेयर इंजीनियर के पद के लिए अपनाई गई भर्ती प्रक्रिया में खामियां पाईं। इसमें कहा गया है कि बुनियादी आवश्यकता को पूरा न करने वाले उम्मीदवार को केवल उच्च डिग्री रखने या योग्यता में उच्च रैंक प्राप्त करने के आधार पर योग्य नहीं माना जा सकता था।
पीठ ने कहा, “मात्र उच्च शैक्षणिक डिग्री प्राप्त करने मात्र से ही कोई उम्मीदवार भर्ती एवं पदोन्नति (आर एंड पी) नियमों के संदर्भ में अनुभव की आवश्यकता को पूरा किए बिना ‘योग्य या पात्र’ नहीं हो जाता, विशेष रूप से तब जब बुनियादी पात्रता मानदंड ही पूरा न हुआ हो।”
इसमें कहा गया है कि इस तरह का कोई भी दृष्टिकोण न्यूनतम योग्यता को तरजीही योग्यता से प्रतिस्थापित करने के बराबर होगा, जो अस्वीकार्य है।
पीठ ने पाया कि उम्मीदवार का चयन मानदंडों के अनुरूप नहीं था। रिकॉर्ड से स्पष्ट रूप से पता चलता है कि चयनित उम्मीदवार के पास आवेदन जमा करने के समय केवल लगभग एक वर्ष का कार्य अनुभव था, जैसा कि आवेदन की स्थिति और सहायक दस्तावेजों से स्पष्ट है।
उसने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में, ‘आर एंड पी’ नियमों के तहत एक अधिमान्य योग्यता, ‘इलेक्ट्रॉनिक्स और संचार में एम.टेक डिग्री’ का होना, न तो पात्रता प्रदान करने के लिए और न ही आवश्यक अर्हता में किसी भी प्रकार की छूट को उचित ठहराने के लिए आधार बनाया जा सकता था।
न्यायालय ने कहा, “चयनित उम्मीदवार, अर्थात अपीलकर्ता, प्रासंगिक तिथि तक ‘कंप्यूटर निर्माण/रखरखाव में कम से कम पांच वर्ष का कार्य अनुभव’ की आवश्यक योग्यता को पूरा नहीं करती थी। यह अनुभव विशिष्ट प्रकृति का है और विचाराधीन पद से संबंधित नहीं है, जिसे कंप्यूटर हार्डवेयर इंजीनियर के रूप में कार्य करने के बाद कोई उम्मीदवार प्राप्त नहीं कर सकता था।”
न्यायालय ने कहा कि उम्मीदवार का चयन और नियुक्ति कानून की दृष्टि से वैध नहीं है।
भाषा प्रशांत अविनाश
अविनाश

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