पश्चिम एशिया संकट के कारण खाद्य तेल की कीमतें बढ़ीं, लेकिन उपलब्धता ‘पर्याप्त’ : सरकार
पश्चिम एशिया संकट के कारण खाद्य तेल की कीमतें बढ़ीं, लेकिन उपलब्धता ‘पर्याप्त’ : सरकार
नयी दिल्ली, 12 अगस्त (भाषा) सरकार ने बुधवार को संसद को बताया कि पश्चिम एशिया संकट का असर खाद्य तेल की वैश्विक और घरेलू कीमतों पर पड़ा है, लेकिन स्थानीय उपलब्धता ‘‘पर्याप्त’’ बनी हुई है क्योंकि प्रमुख आपूर्तिकर्ता देशों से आयात सामान्य व्यापारिक मार्गों से जारी है।
लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में, खाद्य और उपभोक्ता मामलों की राज्य मंत्री निमुबेन जयंतीभाई बांभनिया ने कहा कि भारत अपनी खाद्य तेल की जरूरत का एक बड़ा हिस्सा पूरा करने के लिए आयात पर निर्भर है। इसलिए, घरेलू खाद्य तेल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार के रुझानों पर निर्भर करती हैं।
उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में हालिया भू-राजनीतिक संघर्ष के कारण कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों, ढुलाई और समुद्री बीमा की लागत में बढ़ोतरी हुई, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खाद्य तेल की कीमतें बढ़ गईं।
मंत्री ने कहा, ‘‘कच्चे तेल की ऊंची कीमतों की वजह से ‘पाम’ और सोयाबीन तेल का अधिक इस्तेमाल बायोफ्यूल बनाने में हो रहा है, जिससे निर्यात के लिए इनकी उपलब्धता कम हो गई है और घरेलू व वैश्विक स्तर पर खाने वाले तेल की कीमतें बढ़ गई हैं।’’
उन्होंने कहा कि देश में खाद्य तेल की उपलब्धता पर्याप्त बनी हुई है, क्योंकि मुख्य आपूर्तिकर्ता देशों से आयात सामान्य व्यापारिक मार्गों से जारी है। उन्होंने कहा, ‘‘पर्याप्त भंडार उपलब्ध है और मुख्य आपूर्तिकर्ता देशों से आयात जारी है।’’
मंत्री ने कहा कि सरकार घरेलू बाजार में खाद्य तेल की कीमतों और उपलब्धता पर करीबी नजर रख रही है।
उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं के हित में पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने और कीमतों को स्थिर रखने के लिए, जरूरत पड़ने पर सरकार बाजार में आवश्यक हस्तक्षेप करने के लिए तैयार है। इनमें आयात शुल्क की समीक्षा और व्यापार से जुड़े अन्य उपाय शामिल हैं।
भाषा सुभाष अविनाश
अविनाश

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