पश्चिम बंगाल चुनाव के दौरान निर्वाचन आयोग के विरूद्ध 100 से अधिक मामले दर्ज किये गये

पश्चिम बंगाल चुनाव के दौरान निर्वाचन आयोग के विरूद्ध 100 से अधिक मामले दर्ज किये गये

पश्चिम बंगाल चुनाव के दौरान निर्वाचन आयोग के विरूद्ध 100 से अधिक मामले दर्ज किये गये
Modified Date: July 5, 2026 / 06:26 pm IST
Published Date: July 5, 2026 6:26 pm IST

नयी दिल्ली, पांच जुलाई (भाषा) पश्चिम बंगाल में हाल में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान निर्वाचन आयोग (ईसी) के खिलाफ कलकत्ता उच्च न्यायालय में 110 याचिकाएं दायर की गईं, लेकिन न्यायपालिका ने उसके (आयोग के) सभी फैसलों को सही ठहराया। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।

इस अहम राज्य में अप्रैल में दो चरणों में चुनाव हुए थे, जिसमें भाजपा ने तृणमूल कांग्रेस के 15 साल के शासन को खत्म किया और पहली बार सरकार बनाई। चुनाव में तृणमूल और निर्वाचन आयोग के बीच तनातनी बनी रही।

सरकारी आंकड़ों से पता चलता है कि 15 मार्च को चुनाव की घोषणा किये जाने से लेकर पूरी प्रक्रिया के खत्म होने तक आयोग और उसके फैसलों के खिलाफ कुल 110 मामले दर्ज किए गए।

अधिकारी ने कहा, ‘‘किसी भी मामले में निर्वाचन आयोग के खिलाफ कोई प्रतिकूल आदेश नहीं आया।’’

इस अहम चुनाव के दौरान निर्वाचन आयोग को, खासकर राज्य की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस की ओर से कड़ी जांच, कानूनी चुनौतियों और आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। विपक्षी दलों ने निर्वाचन आयोग पर भाजपा की मदद के लिए पक्षपातपूर्ण चुनाव कराने का आरोप लगाया था।

निर्वाचन आयोग पर यह आरोप भी लगा कि उसने मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) इसलिए किया, ताकि भाजपा का समर्थन न करने वाले मतदाताओं को मताधिकार से वंचित किया जा सके।

एसआईआर के प्रति तृणमूल का विरोध इतना ज़बरदस्त था कि तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने खुद उच्चतम न्यायालय में प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने इस मामले में दलीलें रखीं।

निर्वाचन आयोग हमेशा यह कहता रहा है कि मतदाता सूची में बदलाव का मकसद मृत, दोहराव वाले, दूसरी जगह चले गए और अनुपस्थित मतदाताओं के साथ-साथ विदेशी नागरिकों के नाम हटाना है।

भाषा राजकुमार सुरेश

सुरेश


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