आदिवासी क्षेत्रों में सिकल सेल एनीमिया के लिए 6.97 करोड़ से अधिक जांच : अनुप्रिया पटेल
आदिवासी क्षेत्रों में सिकल सेल एनीमिया के लिए 6.97 करोड़ से अधिक जांच : अनुप्रिया पटेल
नयी दिल्ली, 24 मार्च (भाषा) केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने मंगलवार को राज्यसभा को बताया कि देशभर के आदिवासी बहुल क्षेत्रों में सिकल सेल रोग (एससीडी) का पता लगाने के लिए 6.97 करोड़ से अधिक जांच की जा चुकी हैं और 3.93 करोड़ ‘जेनेटिक स्टेटस कार्ड’ वितरित किए गए हैं।
उच्च सदन को एक प्रश्न के लिखित उत्तर में उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन के तहत शून्य से 40 वर्ष के आयु वर्ग के लक्षित समूह की जांच 17 आदिवासी बहुल राज्यों में जिला अस्पतालों से लेकर आयुष्मान आरोग्य मंदिर स्तर तक सभी स्वास्थ्य सुविधाओं में की जा रही है।
राज्यों द्वारा सिकल सेल रोग पोर्टल पर दी गई जानकारी के अनुसार अब तक 6.97 करोड़ से अधिक जांच की जा चुकी हैं।
सिकल सेल रोग रक्त संबंधी एक समस्या है जिसमें व्यक्ति के अंदर रक्ताल्पता भी होने लगती है।
उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने विभिन्न राज्यों में सिकल सेल रोग के लिए उत्कृष्टता केंद्र (सेंटर ऑफ एक्सीलेंस) स्थापित करने हेतु लागत मानदंड तय किए हैं, जिन्हें जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा वित्तपोषित किया जा रहा है। अब तक 15 राज्यों में 17 उत्कृष्टता केंद्रों को मंजूरी दी गई है।
पटेल ने कहा कि सिकल सेल रोग से पीड़ित मरीजों को उप-स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के माध्यम से कई सेवाएं प्रदान की जा रही हैं, जिनमें नियमित फॉलो-अप, जीवनशैली प्रबंधन पर परामर्श, विवाह-पूर्व और प्रसव-पूर्व निर्णयों के संबंध में सलाह, फोलिक एसिड की गोलियों के माध्यम से पोषण सहायता, संकट लक्षणों की जांच और उच्च स्तरीय स्वास्थ्य संस्थानों को रेफर करना शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत ‘प्रजनन मातृ नवजात शिशु किशोर स्वास्थ्य प्लस पोषण’ (आरएमएनसीएएच+एन) रणनीति के माध्यम से आदिवासी आबादी में कुपोषण और एनीमिया की समस्या दूर करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं, जिसमें प्रसवपूर्व देखभाल, संस्थागत प्रसव, प्रसवोत्तर देखभाल और परिवार नियोजन पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
इसके अलावा पोषण अभियान 2.0 के तहत मातृ पोषण, शिशु और छोटे बच्चों के आहार मानकों, गंभीर और मध्यम कुपोषण के उपचार तथा आयुष पद्धतियों के माध्यम से स्वास्थ्य सुधार पर जोर दिया जा रहा है, ताकि दुबलापन, ठिगनापन और एनीमिया की व्यापकता को कम किया जा सके।
उन्होंने कहा कि आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से छह माह से छह वर्ष तक के बच्चों, गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और किशोरियों को पोषण मानकों के अनुसार पूरक आहार उपलब्ध कराया जा रहा है, जिसमें संतुलित आहार के सिद्धांतों के तहत गुणवत्तापूर्ण प्रोटीन, स्वस्थ वसा और सूक्ष्म पोषक तत्व शामिल होते हैं।
भाषा मनीषा माधव
माधव

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