एनसीईआरटी में आधे से ज्यादा एवं सीबीएसई में 44 प्रतिशत पद रिक्त : संसदीय समिति

एनसीईआरटी में आधे से ज्यादा एवं सीबीएसई में 44 प्रतिशत पद रिक्त : संसदीय समिति

एनसीईआरटी में आधे से ज्यादा एवं सीबीएसई में 44 प्रतिशत पद रिक्त : संसदीय समिति
Modified Date: August 12, 2026 / 10:36 pm IST
Published Date: August 12, 2026 10:36 pm IST

नयी दिल्ली, 12 अगस्त (भाषा) एक संसदीय समिति ने इस बात को लेकर चिंता जतायी है कि राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) के स्वीकृत पदों में आधे से अधिक और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के 44 प्रतिशत पद खाली पड़े हैं।

ये निष्कर्ष ‘किफायती और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए बजट और नीतिगत पहलू (सीबीएसई की समीक्षा सहित)’ पर आकलन समिति की दसवीं रिपोर्ट (अठारहवीं लोकसभा) का हिस्सा हैं। यह रिपोर्ट बुधवार को लोकसभा में पेश की गई।

समिति ने नोट किया कि एनसीईआरटी ने भारत में शैक्षिक नीतियों को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, जिसमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 भी शामिल है, जिसका उद्देश्य भारत में शिक्षा प्रणाली में क्रांति लाना है।

समिति ने एनसीईआरटी में विभिन्न पदों पर बड़ी संख्या में रिक्तियों पर चिंता व्यक्त की। इसमें कहा गया है कि अक्टूबर 2025 तक, एनसीईआरटी की विभिन्न शाखाओं में स्वीकृत 2,844 पदों के मुकाबले वास्तविक संख्या केवल 1,248 थी, जबकि 1,596 पद खाली थे।

रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘समिति का विचार है कि एनसीईआरटी राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा की रूपरेखा तैयार करने और उसे नया रूप देने वाला एक शीर्ष निकाय है और उसमें इतने अधिक पदों का खाली रहने पर मंत्रालय को तत्काल ध्यान देने की जरूरत है।’’

समिति ने कहा कि विभिन्न रिक्तियों को भरने के लिए मंत्रालय द्वारा पूरी ईमानदारी से प्रयास किया जाना चाहिए’।

समिति ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड में स्थायी कर्मचारियों की कमी पर भी चिंता व्यक्त की।

समिति ने कहा कि 2,117 स्वीकृत पदों में से 933 पद (44 प्रतिशत) खाली हैं। उसने गौर किया कि सीबीएसई वर्तमान में अपने दैनिक कामकाज को संभालने के लिए अस्थायी और संविदा कर्मचारियों पर निर्भर है।

रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘समिति का मानना है कि स्थायी कर्मचारियों की ऐसी कमी प्रमुख राष्ट्रीय बोर्ड परीक्षाओं की सुरक्षा, गुणवत्ता और सुचारू संचालन को गंभीर जोखिम में डाल सकती है।’’

भाषा अविनाश सुरेश

सुरेश


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