मैसूर के ऐतिहासिक देवराजा मार्केट और लैंसडाउन बिल्डिंग को संरक्षित किया जाना चाहिए: न्यायालय
मैसूर के ऐतिहासिक देवराजा मार्केट और लैंसडाउन बिल्डिंग को संरक्षित किया जाना चाहिए: न्यायालय
नयी दिल्ली, छह मई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि मैसूर में एक सदी से भी अधिक पुराने देवराजा मार्केट और लैंसडाउन बिल्डिंग को संरक्षित किया जाना चाहिए और आवश्यक नवीनीकरण और जीर्णोद्धार कार्य किए जाने चाहिए।
बाजार और इमारत का निर्माण 1880 के दशक में मैसूर के तत्कालीन महाराजा के शासनकाल के दौरान हुआ था।
न्यायमूर्ति जे बी परदीवाला और न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई की पीठ ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), रुड़की की दोनों ढांचों की स्थिति पर प्रस्तुत रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद चार मई को यह आदेश पारित किया।
पिछले साल सितंबर में उच्चतम न्यायालय ने आईआईटी-रुड़की के निदेशक को बाजार और इमारत का मूल्यांकन करने, उनकी वर्तमान स्थिति का आकलन करने और उन्हें विरासत संरचनाओं के रूप में किस हद तक संरक्षित किया जा सकता है, इस बारे में एक विशेषज्ञ समिति गठित करने के लिए कहा था।
पीठ कर्नाटक उच्च न्यायालय के अगस्त 2023 के एक आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें बाजार और इमारत को ध्वस्त करने या पुनर्निर्माण से रोकने के लिए अधिकारियों को निर्देश के अनुरोध वाली याचिका को खारिज कर दिया गया था।
चार मई को मामले की सुनवाई करते हुए, पीठ ने समिति के अंतिम निष्कर्षों और सिफारिशों पर गौर किया। समिति ने राय दी है कि देवराजा मार्केट और लैंसडाउन बिल्डिंग दोनों को उनके विरासत मूल्य को देखते हुए पुनर्स्थापित और संरक्षित किया जा सकता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इमारतों के बुरी तरह क्षतिग्रस्त या जर्जर हिस्सों को इस समग्र जीर्णोद्धार कार्य के तहत पुनर्निर्माण की भी आवश्यकता होगी।
अदालत ने उच्चतम न्यायालय की रजिस्ट्री को संबंधित पक्षों के वकीलों को रिपोर्ट की एक प्रति उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। पीठ ने कहा, ‘‘समिति की रिपोर्ट को देखते हुए, हमारा मानना है कि दोनों संरचनाओं को संरक्षित किया जाना चाहिए और आवश्यक नवीनीकरण और जीर्णोद्धार कार्य किए जाने चाहिए।’’
पीठ ने मामले की आगे की सुनवाई के लिए 30 जुलाई की तारीख तय की।
भाषा आशीष पवनेश
पवनेश

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