नागपंचमी: नाग पूजा करने से दूर होती हैं बाधाएं
नागपंचमी: नाग पूजा करने से दूर होती हैं बाधाएं
आज नागपंचमी का पर्व मनाया जा रहा है। इस दिन भक्त नागदेवता को दूध पिलाकर जीवन में कल्याण की अराधना करते हैं। कुंडली में कालसर्प दोष हो तो उसका निवारण सिद्ध योग में कराना चाहिए। अग्नि पुराण में लगभग 80 प्रकार के नाग कुलों का वर्णन मिलता है, जिसमें अनन्त, वासुकी, पदम, महापध, तक्षक, कुलिक, और शंखपाल यह प्रमुख माने गये हैं। स्कन्दपुराण, भविष्यपुराण तथा कूर्मपुराण में भी इनका उल्लेख मिलता है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार राहू के जन्म नक्षत्र ‘भरणी के देवता काल हैं एवं केतु के जन्म नक्षत्र अश्लेषा के देवता सर्प हैं। अत: राहू-केतु के जन्म नक्षत्र देवताओं के नामों को जोड़कर कालसर्प योग कहा जाता है। राशि चक्र में 12 राशियां हैं, जन्म पत्रिका में 12 भाव हैं एवं 12 लग्न हैं। इस तरह कुल 144+144 = 288 कालसर्प योग घटित होते हैं।
नागपंचमी के सिद्घ मुहुर्त प्रात: 7:01 बजे के बाद 10:30 से अपरान्ह 3:00 बजे तक चर, लाभ, अमृत के चौघड़िये में कालसर्प शांति कराना अति उत्तम रहेगा। वर्ष के मध्य में कालसर्प योग जिस समय बने उस समय अनुष्ठान भी सर्वश्रेष्ठ रहता है। गोचर में कालसर्प योग 29 अगस्त को प्रात: 5:30 बजे से 4 सितम्बर की रात 12 बजे तक, 17 सितम्बर प्रात: 6 बजे से 2 अक्टूबर प्रात: 8:45 बजे तक, 14 अक्टूबर प्रात: 6:55 बजे से 29 अक्टूबर सांय 6बजे तक बन रहा है। 10 नवम्बर रात्रि 12:30 बजे से 25 नवम्बर रात्रि 2 बजे तक, 8 दिसम्बर प्रात: 11:30 बजे से 23 दिसम्बर प्रात: 8:30 बजे तक एवं 4 जनवरी 2018 सांय 6:50 बजे से 19 जनवरी प्रात: 4:15 बजे तक उपरोक्त समय में भी कालसर्प शांति कराना उत्तम रहेगा।

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