Naxal Leader Devji Surrender News: नक्सलियों को लगा सबसे बड़ा झटका, खूंखार लीडर देव जी ने किया सरेंडर, साथ में मौजूद है 4 साथी

Naxal Leader Devji Surrender News: नक्सल संगठन के मुखिया देव जी ने अपने 4 साथियों के साथ तेलंगाना DGP के सामने सरेंडर कर दिया है।

Naxal Leader Devji Surrender News: नक्सलियों को लगा सबसे बड़ा झटका, खूंखार लीडर देव जी ने किया सरेंडर, साथ में मौजूद है 4 साथी

Naxal Leader Devji Surrender News/Image Credit: IBC24.in File Photo

Modified Date: February 24, 2026 / 03:57 pm IST
Published Date: February 24, 2026 3:49 pm IST

Naxal Leader Devji Surrender News: हैदराबाद: नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे अभियान को बड़ी कामयाबी मिली है। नक्सल संगठन के मुखिया देव जी ने अपने 4 साथियों के साथ तेलंगाना DGP के सामने सरेंडर कर दिया है। प्रतिबंधित माओवादी संगठन के शीर्ष नेता देव जी का पूरा नाम थिप्पिरी तिरुपति है। (Naxal Leader Devji Surrender News) सुरक्षा एजेंसियों का दावा है कि 31 मार्च 2026 से पहले यह अब तक की सबसे बड़ी सफलता है। वहीं कर्रेगुट्टा क्षेत्र में चलाए गए संयुक्त ऑपरेशन “कगार” से संगठन को भारी झटका लगा है। एक और जानकारी सामने आई है कि, माओवादी संग्राम ने भी हथियार डाले हैं। ऐसा माना जा रहा है कि, 31 मार्च 2026 से पहले ही देश से नक्सलवाद का खात्मा हो जाएगा।

Who is Dev Ji: कौन है देवा जी जिसने हाल ही में सरेंडर किया ?

Naxal Leader Devji Surrender News:देव जी, जिसका वास्तविक नाम थिप्पिरी तिरुपति है, देश के सबसे खतरनाक और वरिष्ठ माओवादी नेताओं में गिना जाता रहा है। लगभग 60 वर्षीय देव जी मूल रूप से तेलंगाना (पूर्व आंध्र प्रदेश) के करीमनगर जिले का निवासी है और संगठन में महासचिव जैसे सर्वोच्च पद तक पहुंचने वाला तीसरा लगातार तेलुगु नेता माना जाता है। इंटरमीडिएट शिक्षा के दौरान वह रैडिकल स्टूडेंट्स यूनियन से जुड़ा और (Naxal Leader Devji Surrender News)  यहीं से भूमिगत माओवादी गतिविधियों में शामिल हो गया। तेज रणनीतिक सोच और संगठनात्मक कौशल के कारण वह जल्द ही माओवादियों की मिलिट्री इंटेलिजेंस विंग का प्रमुख बना और बाद में सेंट्रल मिलिट्री कमीशन का इंचार्ज तथा पोलित ब्यूरो सदस्य के रूप में शीर्ष नेतृत्व में शामिल हुआ। मई 2025 में बसवराजु के एनकाउंटर के बाद सितंबर 2025 में उसे CPI (माओवादी) का महासचिव नियुक्त किया गया था।

Dev Ji Surrender : कई बड़े एंबुश और आईईडी हमलों की रणनीति से जुड़ा रह चुका है देव जी

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार देव जी उर्फ देवअन्ना, चेतन, संजीव और सुधर्शन जैसे कई नामों से सक्रिय रहा और गोवा, केरल व बंगाल तक माओवादी नेटवर्क विस्तार में उसकी भूमिका बताई जाती है। वह छत्तीसगढ़ के झीरम घाटी कांड सहित कई बड़े एंबुश और आईईडी हमलों की रणनीति से जुड़ा रहा है और इस कारण (Naxal Leader Devji Surrender News)  उसे देश के सबसे खतरनाक माओवादी नेताओं में माना जाता था। विभिन्न राज्यों में उस पर 1 से 2 करोड़ रुपये तक का इनाम घोषित था।

Naxal Leader Devji Surrender News: सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार देव जी कई बड़े नक्सली हमलों की रणनीति में शामिल रहा, जिनमें झीरम घाटी कांड, एंबुश और आईईडी विस्फोटों की श्रृंखला प्रमुख हैं। उस पर विभिन्न राज्यों में कुल 1 से 2 करोड़ रुपये तक का इनाम घोषित था। मई 2025 में शीर्ष माओवादी नेता बसवराजु के मारे जाने के बाद सितंबर 2025 में उसे संगठन का महासचिव बनाया गया था।

Naxali Surrender News: नक्सलियों का बड़ा धड़ा ढह गया है-विजय शर्मा

छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा कि नक्सलियों का बड़ा धड़ा ढह गया है और कुछ बचे उग्रवादी भी अब सक्रिय नहीं हैं। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों का अभियान तेज गति से जारी है और सशस्त्र नक्सलवाद अपने अंतिम चरण में है। सरकार ने मुख्यधारा में लौटने का आह्वान करते हुए कहा कि शेष उग्रवादी भी आत्मसमर्पण कर समाज में पुनर्वास का अवसर ले सकते हैं।

Naxali Surrender News: ऑपरेशन “कगार” के दबाव में आया संगठन

Naxal Leader Devji Surrender News: बताया जा रहा है कि कर्रेगुट्टा क्षेत्र में चलाए गए संयुक्त ऑपरेशन “कगार” के दबाव से संगठन पूरी तरह बिखर गया, जिसके बाद शीर्ष नेतृत्व ने सरेंडर का रास्ता चुना। सुरक्षाबलों के लगातार अभियान और बढ़ते दबाव के चलते यह कार्रवाई संभव हो सकी है। इस घटनाक्रम को लाल आतंक के खिलाफ अब तक के सबसे बड़े (Naxal Leader Devji Surrender News)  झटकों में से एक माना जा रहा है, जिससे संगठन को गंभीर क्षति पहुंचने की बात कही जा रही है।

31 मार्च 2026 से पहले सुरक्षाबलों को बहुत बड़ी सफलता

बताया जा रहा है कि 31 मार्च 2026 से पहले नक्सल मोर्चे पर यह सुरक्षा बलों की बहुत बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। माना जा रहा है कि शीर्ष नेतृत्व के सरेंडर से क्षेत्र में नक्सल गतिविधियों पर बड़ा असर पड़ सकता है और आने वाले समय में और भी कैडरों के आत्मसमर्पण की संभावना बढ़ सकती है।

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