नयी दिल्ली, 27 अगस्त (भाषा) कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने व्यवसायी सुभाष चंद्रा के मामले में राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) द्वारा मंजूर पुनर्भुगतान योजना को लेकर बृहस्पतिवार को दावा किया कि एनएसीएलटी का मतलब ‘‘नेता-कंपनी लूट ट्रिब्यूनल’’ है।
उनके दावे पर फिलहाल चंद्रा और उनकी कंपनी की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है।
राहुल गांधी ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर दावा किया कि एनसीएलटी का मतलब ‘‘नेता-कंपनी लूट ट्रिब्यूनल’’ है।
उन्होंने कहा, ‘‘किसान 50 हज़ार न चुकाए तो ज़मीन नीलाम हो जाती है। वेतनभोगी वर्ग एक किश्त न भर पाएं तो घर पर बैंक के गुंडे पहुंच जाते हैं। गरीब छात्रों को तो शिक्षा तक के लिए लोन नहीं मिलता। मगर, चुनिंदा ‘मित्रों’ के लिए बैंक का पैसा निजी संपत्ति है – कितना भी निकालो, जो मर्ज़ी चुकाओ।’’
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने देश में दो व्यवस्थाएं बना रखी हैं, एक चंद अरबपतियों के लिए, दूसरी बाक़ी सबके लिए है।
इससे पहले, कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि वित्तीय शब्दावली में जब लेनदारों को बकाया रकम का केवल एक हिस्सा मिलता है तो अंतर को प्रतिशत के रूप में ‘हेयरकट’ कहा जाता है।
उन्होंने कहा, ‘‘राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण ने अभी एक जाने-माने कारोबारी की पुनर्भुगतान योजना को मंजूरी दी है, जिसके तहत लेनदारों को करीब 22,006.57 करोड़ रुपये के स्वीकृत दावों के मुकाबले केवल 6.5 करोड़ रुपये मिलेंगे।’’
कांग्रेस महासचिव ने कहा, ‘‘यह सिर्फ हेयरकट नहीं है। यह वास्तव में मुंडन है और दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता, 2016 का पूरा मजाक बनाता है।’’
एनसीएलटी ने मीडिया कारोबारी सुभाष चंद्रा की व्यक्तिगत दिवाला समाधान प्रक्रिया में करीब 22,006.57 करोड़ रुपये के स्वीकृत कर्ज दावों के निपटान के लिए 6.5 करोड़ रुपये के भुगतान वाली पुनर्भुगतान योजना को मंजूरी दी है।
इस योजना को मंजूरी मिलने से कर्जदाताओं को करीब 99.97 प्रतिशत बकाया का नुकसान (हेयरकट) स्वीकार करना होगा।
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