नीट: न्यायालय ने केंद्र से राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों को लेकर उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी
नीट: न्यायालय ने केंद्र से राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों को लेकर उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी
नयी दिल्ली, 19 अगस्त (भाषा) राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) में सुधारों को संस्थागत रूप देने की जरूरत पर जोर देते हुए उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह उसे राधाकृष्णन समिति और नंदन नीलेकणि समिति की सिफारिशों को लागू करने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी दे।
न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति अलोक अराधे की पीठ ने कहा कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) में किए जाने वाले सुधारों को संस्थागत रूप दिया जाना चाहिए और प्रवेश परीक्षाओं का सुचारु संचालन सुनिश्चित करने के लिए तकनीकी बदलाव किए जाने की जरूरत है।
नीट-यूजी प्रश्नपत्र लीक होने के बाद शिक्षा मंत्रालय ने परीक्षा प्रक्रिया में सुधार, डेटा सुरक्षा प्रोटोकॉल को बेहतर बनाने तथा एनटीए की संरचना और कार्यप्रणाली में सुधार के लिए सिफारिशें देने हेतु सात सदस्यीय राधाकृष्णन समिति का गठन किया था।
सरकार ने नीट परीक्षाओं में संरचनात्मक सुधारों के लिए इन्फोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि के नेतृत्व में एक उच्चाधिकार प्राप्त कार्य बल का भी गठन किया था।
पीठ ने कहा, ‘‘राधाकृष्णन समिति ने सही कहा है कि यह एक प्रणालीगत समस्या है, जिसे संस्थागत रूप देने की जरूरत है और यही इसका सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। कागज पर यह प्रक्रिया पूरी तरह अच्छी दिखती है। लेकिन जब एक परीक्षा होने के बाद अगली परीक्षा आती है तब तक परिस्थितियां पूरी तरह बदल जाती हैं।’’
न्यायालय ने कहा कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) को सभी आवश्यक बुनियादी ढांचे, पर्याप्त श्रमबल और अन्य तकनीकी क्षमताओं से लैस किया जाना चाहिए।
पीठ ने कहा, ‘‘हमें बताया गया है कि गठित समिति ने परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए विभिन्न सिफारिशों पर विचार किया है। इनमें परीक्षा की सुरक्षा और विश्वसनीयता को मजबूत करने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और ‘ब्लॉकचेन’ जैसी उन्नत तकनीकों का इस्तेमाल करने पर विशेष जोर दिया गया है।’’
पीठ ने कहा, ‘‘हम सचिव को निर्देश देते हैं कि वह हलफनामा दाखिल कर राधाकृष्णन समिति द्वारा की गई सिफारिशों को लागू करने के लिए उठाए गए कदमों का विवरण दें, जिन्हें नंदन नीलेकणि समिति ने आगे परिष्कृत और विस्तृत किया है। यह हलफनामा इन कदमों को लागू करने की संभावित समय-सीमा के साथ तीन सप्ताह के भीतर दाखिल किया जाए।’’
सुनवाई की शुरुआत में मेहता ने न्यायालय को बताया कि नीट प्रश्नपत्र की छपाई से लेकर छात्रों को प्रश्नपत्र मिलने तक पूरी प्रक्रिया में सुरक्षा के कई उपाय अपनाए जाते हैं।
उन्होंने कहा कि नीट परीक्षाओं के लिए लागू व्यवस्था पूरी तरह सुरक्षित है और इसमें सेंध लगाना बेहद मुश्किल है।
उन्होंने बताया कि कई मॉडरेटर्स यानी प्रश्न तैयार करने और उनकी समीक्षा करने वाले विशेषज्ञों से प्रश्न बैंक तैयार कराया जाता है और उन्हें यह जानकारी नहीं होती कि उनमें से कौन से प्रश्न अंतिम प्रश्नपत्र में शामिल किए जाएंगे।
उन्होंने कहा, ‘‘किसी एक व्यक्ति के हाथ में यह तय करने की जिम्मेदारी न हो कि प्रश्नपत्र में कौन से 100 प्रश्न आएंगे, इसलिए किसी विषय के लिए 500 प्रश्नों का प्रश्न बैंक तैयार करने को कई मॉडरेटर्स से कहा जाता है।’’
सुरक्षा के विस्तृत इंतजामों के बारे में बताते हुए मेहता ने कहा कि परीक्षा के प्रश्नपत्र अलग-अलग चिह्नित प्रिंटिंग प्रेस को भेजे जाते हैं, जहां सीसीटीवी कैमरों और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) की निगरानी रहती है।
उन्होंने बताया कि प्रश्नपत्रों को पुलिस सुरक्षा में और जीपीएस के जरिए ले जाया जाता है तथा उन्हें अलग-अलग बैंक के स्ट्रॉन्ग रूम में सुरक्षित रखा जाता है।
मेहता ने कहा कि परीक्षा के दिन प्रश्नपत्र का एक सेट चुना जाता है। इसे सुरक्षा व्यवस्था के बीच परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाया जाता है और अधिकारियों तथा छात्रों की मौजूदगी में खोला जाता है। पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की जाती है।
इस पर शीर्ष न्यायालय ने कहा कि मेहता जिन सुरक्षा उपायों का उल्लेख कर रहे हैं, राधाकृष्णन समिति पहले ही इन पर विचार कर चुकी है।
न्यायालय ने कहा कि यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि एनटीए एक मजबूत, सक्रिय और सक्षम संस्थान के रूप में काम करे।
पीठ ने कहा, ‘‘हमारा दायित्व यह सुनिश्चित करना है कि एक ऐसा सक्षम संस्थान हो, जिस पर देश गर्व कर सके। यदि आप व्यवस्था को संस्थागत रूप नहीं देंगे, तो अनुभवी अधिकारियों का तबादला होता रहेगा और उनके अनुभव का पूरा लाभ नहीं मिल पाएगा। इसके अलावा, कई तकनीकी बदलाव भी लाने की जरूरत है।’’
पीठ ने यह समझाने के लिए संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) का उदाहरण भी दिया कि समय के साथ कोई परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था किस तरह संस्थागत विशेषज्ञता विकसित करती है।
न्यायालय ने कहा, ‘‘समय के साथ यूपीएससी लगातार एक के बाद एक परीक्षाएं आयोजित करता रहा और धीरे-धीरे उसने संस्थागत अनुभव और विशेषज्ञता विकसित कर ली। जिस संस्था को परीक्षा आयोजित करने की जिम्मेदारी दी जाती है, उसे भी समय के साथ खुद को बेहतर और उन्नत करते रहना चाहिए तथा एक सक्षम और मजबूत संस्थान के रूप में विकसित होना चाहिए।’’
न्यायालय याचिकाओं के एक समूह पर सुनवाई कर रहा था। इनमें ‘फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन’ की ओर से अधिवक्ता तन्वी दुबे द्वारा दायर याचिका भी शामिल है।
इनमें से एक याचिका में अनुरोध किया गया है कि नीट-यूजी आयोजित करने के लिए जिम्मेदार राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी को हटाकर उसकी जगह एक मजबूत और स्वायत्त संस्था बनाई जाए या एनटीए का पुनर्गठन किया जाए, ताकि मेडिकल प्रवेश परीक्षा का सुचारु और निष्पक्ष संचालन सुनिश्चित हो सके।
प्रश्नपत्र लीक के आरोपों की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) कर रहा है।
वर्ष 2024 में नीट-यूजी का प्रश्नपत्र कथित तौर पर लीक होने के बाद उच्चतम न्यायालय ने परीक्षा रद्द करने से इनकार कर दिया था। हालांकि, न्यायालय ने प्रश्नपत्र लीक जैसी घटनाओं से निपटने के लिए कई निर्देश जारी किए थे। साथ ही, किस परिस्थितियों में किसी सार्वजनिक परीक्षा को रद्द किया जा सकता है, इसके लिए भी एक मानदंड तय किया था।
भाषा
गोला पवनेश
पवनेश

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