बंगाल में नयी सरकार का शपथग्रहण नौ मई को; मोदी, शाह के शामिल होने की संभावना

बंगाल में नयी सरकार का शपथग्रहण नौ मई को; मोदी, शाह के शामिल होने की संभावना

बंगाल में नयी सरकार का शपथग्रहण नौ मई को; मोदी, शाह के शामिल होने की संभावना
Modified Date: May 6, 2026 / 08:27 pm IST
Published Date: May 6, 2026 8:27 pm IST

कोलकाता, छह मई (भाषा) पश्चिम बंगाल में भाजपा की पहली सरकार का शपथग्रहण समारोह नौ मई को यहां ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित किया जाएगा, जो दशकों तक राजनीतिक हाशिये पर रहने के बाद राज्य में भगवा खेमे के सत्ता में आने का प्रतीक होगा।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा ने प्रचंड जीत दर्ज करते हुए तृणमूल कांग्रेस के 15 साल के शासन का अंत कर दिया।

पार्टी सूत्रों के अनुसार, सुबह 10 बजे शुरू होने वाले शपथग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन और कई केंद्रीय मंत्रियों के उपस्थित रहने की उम्मीद है।

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने बुधवार को घोषणा की, ‘‘नयी भाजपा सरकार 9 मई को सुबह 10 बजे ब्रिगेड परेड ग्राउंड में शपथ लेगी।’’

भले ही भाजपा नेतृत्व ने मुख्यमंत्री पद के चेहरे को लेकर चुप्पी साध रखी हो, लेकिन शुभेंदु अधिकारी पश्चिम बंगाल की राजनीति में पार्टी के प्रमुख जन नेता के रूप में अपनी स्थिति मजबूत करने के बाद आंतरिक चर्चाओं में सबसे आगे हैं।

अधिकारी कभी ममता बनर्जी के सबसे करीबी सहयोगियों में शामिल थे। वह पूर्वी मेदिनीपुर जैसे जिलों में तृणमूल कांग्रेस के ग्रामीण विस्तार के प्रमुख वास्तुकार भी थे। वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव से पहले वह भाजपा में शामिल हो गए थे और बंगाल के सबसे चर्चित राजनीतिक मुकाबलों में से एक में नंदीग्राम में बनर्जी को हराने में सफल रहे।

पांच साल बाद, उन्होंने भवानीपुर में बनर्जी को उनके ही गढ़ में 15 हजार से अधिक मतों से हराकर बंगाल की राजनीति में खुद को ‘धुरंधर’ साबित किया।

मुख्यमंत्री पद के लिए अन्य संभावित नामों में भट्टाचार्य, केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार और पूर्व राज्यसभा सदस्य स्वपन दासगुप्ता के नाम शामिल हैं। हालांकि, पार्टी के अंदरूनी सूत्रों ने संकेत दिया कि नेतृत्व बंगाल की भाषाई और सांस्कृतिक परंपराओं में निहित एक ‘‘भूमिपुत्र’’ चेहरे को पेश करेगा।

चुनाव प्रचार के दौरान, शाह ने बार-बार इस बात पर जोर दिया कि बंगाल में भाजपा का मुख्यमंत्री ‘‘भूमिपुत्र’’ होगा, जिसका जन्म और शिक्षा-दीक्षा राज्य में ही हुई होगी। उन्होंने यह बात बार-बार तृणमूल कांग्रेस के उस आरोप को गलत साबित करने के लिए कही जिसमें भाजपा पर बंगाल की सामाजिक और बौद्धिक लोकाचार से अलग एक ‘‘बाहरी’ राजनीतिक संस्कृति का प्रतिनिधित्व करने का आरोप लगाया गया था।

भाजपा ने 294 विधानसभा सीट में से 207 सीट जीतकर तृणमूल कांग्रेस के 15 वर्षों के शासन का खात्मा कर दिया। इसने उस राज्य में सबसे बड़ी सफलता दर्ज की, जहां कभी उसे अपना चुनावी खाता खोलने के लिए भी संघर्ष करना पड़ता था।

खास बात यह है कि शपथग्रहण समारोह बंगाली पंचांग के बैसाख महीने के 25वें दिन आयोजित किया जाएगा जिसे पूरे राज्य में रवींद्र जयंती के रूप में मनाया जाता है, जो रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती है। इससे कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रतीकात्मकता की झलक नजर आएगी।

राजनीतिक हलकों में इस तारीख के चयन को भाजपा द्वारा बंगाल की सांस्कृतिक परिकल्पना में अपने ऐतिहासिक उदय को स्थापित किए जाने और अपनी पहचान से संबंधित आरोपों का मुकाबला करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

पिछले एक दशक में, भाजपा ने बंगाल के सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के प्रतीकों – टैगोर और स्वामी विवेकानंद से लेकर नेताजी सुभाष चंद्र बोस तथा श्यामा प्रसाद मुखर्जी तक – को राज्य में अपने भावनात्मक और राजनीतिक प्रभाव को बढ़ाने के व्यापक वैचारिक प्रयास के हिस्से के रूप में लगातार अपनाकर उनकी पुनर्व्याख्या करने का प्रयास किया है।

पार्टी के अंदरूनी सूत्रों ने कहा कि मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार का चयन करते समय नेतृत्व राज्य की प्रतिस्पर्धी क्षेत्रीय आकांक्षाओं को संतुलित करने की आवश्यकता के प्रति भी सचेत है, और इस बात पर भी चर्चा हो रही है कि क्या उत्तरी बंगाल को अधिक प्रतिनिधित्व दिया जाना चाहिए, जहां भाजपा ने लगातार चुनाव में अच्छा प्रदर्शन किया है।

नवनिर्वाचित भाजपा विधायकों की बैठक आठ मई की शाम बुलाई गई है, हालांकि नेतृत्व मुख्यमंत्री पद के चेहरे को लेकर चुप्पी साधे हुए है।

ब्रिगेड परेड ग्राउंड में होने वाला समारोह न केवल सत्ता हस्तांतरण का प्रतीक माना जा रहा है, बल्कि पश्चिम बंगाल के राजनीतिक इतिहास में एक निर्णायक क्षण भी है, जो भाजपा की राज्य में हाशिये से सत्ता के केंद्र तक की लंबी वैचारिक और संगठनात्मक यात्रा को दर्शाता है। पश्चिम बंगाल ने भारत के अन्य हिस्सों में देखी गई भगवा लहर को दशकों तक स्वीकार नहीं किया था।

भाषा नेत्रपाल अविनाश

अविनाश


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