एनएचआरसी ने राज्यों को भीषण गर्मी से कमजोर वर्गों की रक्षा के लिए कदम उठाने को कहा

एनएचआरसी ने राज्यों को भीषण गर्मी से कमजोर वर्गों की रक्षा के लिए कदम उठाने को कहा

एनएचआरसी ने राज्यों को भीषण गर्मी से कमजोर वर्गों की रक्षा के लिए कदम उठाने को कहा
Modified Date: April 28, 2026 / 04:02 pm IST
Published Date: April 28, 2026 4:02 pm IST

नयी दिल्ली, 28 अप्रैल (भाषा) भीषण गर्मी और लू की बढ़ती आवृत्ति और तीव्रता के कारण कमजोर वर्गों पर पड़ने वाले असमान प्रभाव की ओर इशारा करते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने मंगलवार को 21 राज्यों और दिल्ली से कमजोर आबादी के बचाव के लिए अग्रिम कदम उठाने को कहा।

एनएचआरसी ने एक बयान में कहा कि बुजुर्ग, बच्चे और नवजात शिशु अत्यधिक गर्मी के स्वास्थ्य संबंधी प्रभावों के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील होते हैं। इसके अलावा, लू के कारण आजीविका का नुकसान हो सकता है और आग लगने की दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ सकता है।

पिछले कुछ दिनों में देश के विभिन्न राज्यों में पारा का स्तर काफी बढ़ गया है और दिल्ली में कई स्थानों पर तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है।

इस संदर्भ में, एनएचआरसी ने 21 राज्यों और दिल्ली से भीषण गर्मी के दौरान संवेदनशील आबादी की रक्षा के लिए अग्रिम कार्रवाई करने और राहत उपायों को लागू करने को कहा है।

ये राज्य हैं आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, कर्नाटक, केरल, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, सिक्किम, तमिलनाडु, तेलंगाना, त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल।

आयोग ने कहा कि ‘‘भीषण गर्मी की आवृत्ति, अवधि और तीव्रता में वृद्धि से हाशिए पर रहने वाले, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों, श्रमिकों और बेघरों पर असमान रूप से प्रभाव पड़ता है क्योंकि उनके पास पर्याप्त आश्रय और संसाधनों की कमी होती है।’’

इसलिए, एनएचआरसी ने इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली के मुख्य सचिवों को लिखे पत्र में एकीकृत और समावेशी उपायों की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया है।

एनएचआरसी ने अपर्याप्त आश्रय और संसाधनों के बीच लू के कारण आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों, श्रमिकों, बुजुर्गों, बच्चों, नवजात शिशुओं और विशेष रूप से बेघर लोगों द्वारा सामना किए जाने वाले जोखिमों पर भी प्रकाश डाला है।

एनएचआरसी ने राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों का हवाला दिया है जिसके अनुसार 2019 से 2023 के बीच भारत में भीषण गर्मी या लू लगने से करीब 3,712 लोगों की मौत हो गई। आयोग ने राज्यों से आग्रह किया कि वे भीषण गर्मी के प्रभाव को कम करने और जनहानि को रोकने के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) द्वारा जारी मौजूदा मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) या दिशानिर्देशों के अनुसार राहत उपायों की सुचारु योजना बनाएं और उनका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करें।

भाषा आशीष पवनेश

पवनेश


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