आतंकी धमकियों की एनआईए से जांच कराई जाए : पनून कश्मीर

आतंकी धमकियों की एनआईए से जांच कराई जाए : पनून कश्मीर

आतंकी धमकियों की एनआईए से जांच कराई जाए : पनून कश्मीर
Modified Date: August 25, 2026 / 10:32 pm IST
Published Date: August 25, 2026 10:32 pm IST

जम्मू, 25 अगस्त (भाषा) पनून कश्मीर के अध्यक्ष टीटो गंजू ने मंगलवार को ताजा आतंकी धमकियों की राष्ट्रीय अन्वेषण एजेंसी (एनआईए) से जांच कराने की मांग की।

गंजू ने चेतावनी दी कि विस्थापित समुदाय को बार-बार मिलने वाली धमकियों और लक्षित हिंसा को ‘‘सामान्य’’ बात नहीं बनने दिया जा सकता।

उन्होंने कहा कि धमकी भरे संदेशों में निजी जानकारी का इस्तेमाल ऐसी जानकारी के स्रोत और उसके प्रसार को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि डर का लगातार बना हुआ माहौल समुदाय की कश्मीर में सुरक्षित और सम्मानजनक वापसी में मदद करने के बजाय, उनके विस्थापन के नतीजों को और लंबा खींचने का जोखिम पैदा करता है।

पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा का मुखौटा संगठन माने जाने वाले ‘यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल’ की ओर से 23 अगस्त को जारी कथित धमकी भरे पत्र में, प्रधानमंत्री के विशेष पैकेज के तहत भर्ती किए गए कई कश्मीरी पंडित कर्मचारियों के नाम शामिल हैं।

सोशल मीडिया पर वायरल हुए इस दस्तावेज में जम्मू के रिहायशी पते, गाड़ियों के नंबर और फोन नंबर जैसी गोपनीय जानकारी शामिल थी।

गंजू ने एक बयान में कहा, ‘‘जब भी तथ्यों से किसी आतंकी साजिश का पता चलता है, तो एनआईए द्वारा इसकी गहन जांच होनी चाहिए। सवाल सिर्फ यह नहीं है कि ये धमकियां किसने दीं, बल्कि यह भी है कि निजी जानकारी किसने उपलब्ध कराई, किसने इसे इकट्ठा किया, किसने हासिल की, किसने इसे आगे बढ़ाया और किसने इस पूरी प्रक्रिया में मदद की।’’

उन्होंने भाजपा महासचिव (संगठन) अशोक कौल के उन बयानों पर स्पष्टीकरण मांगा, जिनमें कहा गया था कि लक्षित हत्याएं नहीं रुकेगी और ‘‘भाईचारे’’ की जरूरत है। उन्होंने सवाल किया कि क्या यह कश्मीरी पंडितों की सुरक्षा और उनकी वापसी पर पार्टी का आधिकारिक रुख है।

उन्होंने भाजपा से यह स्पष्ट करने को कहा कि क्या वह सिर्फ विस्थापित कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास के पक्ष में है या कश्मीर में उनका सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन ‘‘पूरी तरह से बहाल करने’’ के पक्ष में है।

भाषा सुभाष दिलीप

दिलीप


लेखक के बारे में