इस साल पहली छमाही में अभियानों में सीआरपीएफ के किसी जवान की जान नहीं गई

इस साल पहली छमाही में अभियानों में सीआरपीएफ के किसी जवान की जान नहीं गई

इस साल पहली छमाही में अभियानों में सीआरपीएफ के किसी जवान की जान नहीं गई
Modified Date: July 1, 2026 / 10:24 pm IST
Published Date: July 1, 2026 10:24 pm IST

नयी दिल्ली, एक जुलाई (भाषा) देश की आंतरिक सुरक्षा में अहम भूमिका निभाने वाले केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) ने एक सुखद मुकाम दर्ज किया है। बल द्वारा इस साल की पहली छमाही में चलाए गए अभियानों में किसी जवान की जान नहीं गई और गत कई दशकों में पहली बार ऐसा हुआ है।

सीआरपीएफ के महानिदेशक जी.पी. सिंह ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि यह मुकाम तब हासिल हुआ जब अर्धसैनिक बल की तैनाती वाले अलग-अलग इलाकों में ‘‘निरंतर’ और ‘तीव्रता’ से अभियान चलाए जा रहे थे।

सिंह ने लिखा, ‘‘शांति का लाभ – उपलब्ध आंकड़ों से ज्ञात होता है कि कई दशकों में पहली बार, एक जनवरी से 30 जून, 2026 तक की अवधि यानी साल की पहली छमाही में सीआरपीएफ को किसी अभियान के दौरान कोई नुकसान (जान की) नहीं उठाना पड़ा।’’

उन्होंने कहा कि ‘‘नक्सलवाद के खात्मे (केंद्र ने मार्च में इसकी घोषणा की) की वजह से सीआरपीएफ के लिए लगातार नौवां महीना ऐसा रहा, जिसमें किसी अभियान के दौरान कोई हताहत नहीं हुआ है। कई दशकों में ऐसा पहली बार हुआ है।’’

सीआरपीएफ प्रमुख ने कहा कि इन आंकड़ों के पीछे ‘‘नक्सलवाद को कुचलना, अभियान की रणनीतियों में बदलाव और सरकार की ओर से बेहतरीन साजो समान मुहैया’’ कराना मुख्य वजहें रही हैं।

अधिकारियों ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि पिछले साल इसी अवधि में सीआरपीएफ के पांच जवानों की जान गई थी।

सीआरपीएफ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि ये आंकड़े ‘‘काफी संतोषजनक ’’ हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘सीआरपीएफ के जवान देश के कई अशांत इलाकों में आंतरिक सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, जिसके कारण दुर्भाग्य से पिछले कई सालों में काफी संख्या में जवानों की जान गई। पिछले कुछ महीनों में अभियानों के दौरान एक भी जवान या अधिकारी की जान न जाना, बेहतर होती सुरक्षा स्थिति और बल द्वारा अपनी गलतियों से सीखने को दर्शाता है।’’

उन्होंने कहा कि वह ‘‘उम्मीद करते हैं कि 2026 और उसके बाद भी बहुत शांतिपूर्ण स्थिति बनी रहेगी।’’

सीआरपीएफ में करीब 3.25 लाख जवान कार्यरत हैं और देश भर में आंतरिक सुरक्षा से जुड़े कई काम बल के जिम्मे है। इनमें नक्सल-विरोधी अभियान, जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद-विरोधी अभियान और पूर्वोत्तर राज्यों में उग्रवाद-विरोधी अभियान शामिल हैं।

बल की स्थापना 1939 में ब्रिटिश शासन के दौरान की गई थी। आजादी के दो साल बाद इसका नाम बदलकर सीआरपीएफ कर दिया गया था। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अब तक बल के 2,270 जवान और अधिकारी ड्यूटी के दौरान अपनी जान गंवा चुके हैं।

भाषा धीरज अविनाश

अविनाश


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