कर्नाटक कांग्रेस में मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए कोई लड़ाई नहीं: सिद्धरमैया
कर्नाटक कांग्रेस में मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए कोई लड़ाई नहीं: सिद्धरमैया
मंगलुरु, 11 जनवरी (भाषा) कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने रविवार को सत्तारूढ़ कांग्रेस पार्टी के भीतर सत्ता संघर्ष की अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि राज्य में मुख्यमंत्री पद को लेकर कोई लड़ाई नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा कि वह नफरती भाषण विधेयक (हेट स्पीच बिल) पर जानकारी देने के लिए राज्यपाल थावरचंद गहलोत से मुलाकात करेंगे।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के इन दावों पर कि संक्रांति के बाद मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए फिर से संघर्ष शुरू होगा, सिद्धरमैया ने पत्रकारों से कहा, ‘कोई लड़ाई नहीं है, यह आप (मीडिया) पैदा करते हैं। बिना वजह ऐसे सवाल पूछे जाते हैं।’
वह भाजपा के उस सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़े एक सवाल का जवाब दे रहे थे, जिसमें दावा किया गया था कि संक्रांति पर्व के बाद कांग्रेस पार्टी में मुख्यमंत्री पद की कुर्सी के लिए संघर्ष एक बार फिर शुरू होगा।
राज्य में मुख्यमंत्री के संभावित बदलाव को लेकर अटकलों ने तब जोर पकड़ा, जब कांग्रेस सरकार ने 20 नवंबर को अपने पांच वर्षीय कार्यकाल का आधा समय पूरा कर लिया। इन अटकलों को 2023 में सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डी के शिवकुमार के बीच हुए ‘सत्ता-साझेदारी’ समझौते से भी बल मिला।
नफरत फैलाने वाले भाषण से संबंधित विधेयक पर भाजपा द्वारा राज्यपाल से इसे मंजूरी न देने के आग्रह किए जाने की योजना के बीच, मुख्यमंत्री ने कहा कि वह राज्यपाल थावरचंद गहलोत से मिलकर उन्हें इस विधेयक के बारे में जानकारी देंगे।
सिद्धरमैया ने कहा, ‘विधेयक विधायिका द्वारा पारित किया गया है। राज्यपाल ने इसे न तो खारिज किया है, न वापस भेजा है और न ही अपनी सहमति दी है। देखते हैं, जब भी वह (राज्यपाल) बुलाएंगे, मैं जाकर उन्हें इसके बारे में जानकारी दूंगा।’
विधेयक में नफरती अपराध के लिए एक वर्ष की जेल की सजा का प्रस्ताव है, जिसे 50,000 रुपये के जुर्माने के साथ सात साल तक बढ़ाया जा सकता है। बार-बार अपराध करने पर अधिकतम सात साल की कैद और एक लाख रुपये के जुर्माने का प्रावधान है।
भाषा सुमित पवनेश
पवनेश

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