नयी दिल्ली, नौ अगस्त (भाषा) विपक्षी दलों ने रविवार को पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के उस बयान को लेकर उन पर निशाना साधा, जिसमें उन्होंने कहा था कि नीट प्रश्नपत्र लीक मुद्दे पर हुए प्रदर्शनों के दौरान ‘जेन जी’ को ‘‘गुमराह’’ करने की कोशिश की गई। विपक्ष ने कहा कि छात्र वास्तविक और जायज चिंताओं को उठा रहे थे और आरोप लगाया कि वास्तव में लोगों को गुमराह करने की ‘‘आदत’’ भाजपा की है।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और संबलपुर से सांसद धर्मेंद्र प्रधान ने दावा किया कि प्रदर्शनों के दौरान ‘जेन जी’ को गुमराह करने की कोशिश की गई थी, जिसके बाद उन्हें केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा।
प्रधान के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने रुद्रपुर में ‘पीटीआई वीडियो’ से कहा, ‘‘यह स्पष्ट नहीं है कि उनकी मंत्री पद पर बने रहने की महत्वाकांक्षा थी या उन्हें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अथवा गृह मंत्री अमित शाह की ओर से ऐसा निर्देश मिला था। छात्र यह मानते हैं कि वह जिम्मेदार थे, क्योंकि वह उस पद पर थे।’’
खरगे ने कहा, ‘‘गृह मंत्री के पास सीबीआई, खुफिया ब्यूरो और सभी जांच एजेंसियां हैं, इसलिए उन्हें इस मामले की जांच करानी चाहिए।’’
आम आदमी पार्टी के संजय सिंह ने भी प्रधान की टिप्पणी की आलोचना करते हुए कहा, ‘‘क्या प्रश्नपत्र लीक हुआ था या नहीं? 21 छात्रों की जान चली गई। छात्रों को गुमराह किए जाने का कोई सवाल ही नहीं है।’’
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) नेता अरविंद सावंत ने दावा किया कि लोगों को गुमराह करना भाजपा की चाल है।
सावंत ने कहा, ‘‘भारतीय जनता पार्टी का जन्म ही लोगों को गुमराह करने की राजनीति से हुआ है। 2जी और 3जी मामलों को देखिए। तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को निशाना बनाते हुए ए राजा, कनिमोई और दयानिधि मारन पर आरोप लगाए गए।’’
उन्होंने कहा, ‘‘कांग्रेस सरकार को भ्रष्ट बताने वाली छवि बनाई गई, लेकिन वह भी लोगों को गुमराह करने वाली बात थी। बच्चों ने किसी को गुमराह नहीं किया, उन्होंने सच बोला और आपको (भाजपा को) आईना दिखाया।’’
सावंत ने दावा किया कि भारत के लोग अब समझने लगे हैं कि ‘‘भाजपा का मतलब झूठ है।’’
शिवसेना (उबाठा) के सांसद संजय राउत ने भी प्रधान पर निशाना साधते हुए कहा कि ‘जेन जी’ की प्रतिक्रिया शिक्षा से जुड़े मुद्दों, खासकर प्रश्नपत्र लीक मामलों से निपटने के प्रधान के तरीके के कारण सामने आई।
राउत ने कहा, ‘‘उन्हें (प्रधान को) प्रधानमंत्री मोदी, नितिन नवीन और आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के साथ बैठकर यह तय करना चाहिए कि ‘जेन जी’ को गुमराह किया गया था या उन्हें उकसाया गया था। अगर ‘जेन जी’ को गुमराह किया गया था तो उन्हें किसने गुमराह किया? और अगर उन्हें उकसाया गया था तो किसने उकसाया? इन सवालों के जवाब देने की जरूरत है।’’
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद मनोज झा ने कहा कि प्रधान की टिप्पणी को नजरअंदाज किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि हर पीढ़ी को लगता है कि अगली पीढ़ी को गुमराह किया गया है, लेकिन यह सही नहीं है। युवा पीढ़ी की अपनी जायज चिंताएं हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘एक ऐसी शिक्षा व्यवस्था विकसित हो गई है, जिसमें भविष्य की संभावनाएं खत्म हो गई हैं। यह केवल किसी एक सरकार की बात नहीं है, बल्कि पूरी व्यवस्था का मुद्दा है।’’
प्रधान ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए बड़े विरोध प्रदर्शनों के बीच पद छोड़ने के दो सप्ताह बाद, शनिवार को जीएम विश्वविद्यालय में छात्रों और शिक्षकों को संबोधित करते हुए अपने इस्तीफे पर पहली बार प्रतिक्रिया दी।
प्रधान ने कहा, ‘‘जेन जी हमारे बच्चे हैं। कुछ लोगों ने उन्हें गुमराह करने की कोशिश की। भारत में हर साल कम से कम दो करोड़ बच्चे जन्म लेते हैं। पिछले 10 वर्षों में 20 करोड़ बच्चे पैदा हुए हैं। उनकी अपनी आकांक्षाएं हैं और वे भारत को ‘विश्व गुरु’ बनाएंगे। मेरे लिए पद महत्वपूर्ण नहीं था।’’
प्रधान ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात कर केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफा देने की पेशकश की थी।
प्रधान ने 25 जुलाई को केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।
भाषा आशीष नरेश
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