झारखंड में लगातार सातवें वर्ष गंगा की मुख्य धारा में प्रदूषण नहीं: नमामि गंगे
झारखंड में लगातार सातवें वर्ष गंगा की मुख्य धारा में प्रदूषण नहीं: नमामि गंगे
नयी दिल्ली, 19 मई (भाषा) गंगा की मुख्य धारा का सबसे छोटा हिस्सा झारखंड से होकर गुजरता है और यह हिस्सा लगातार सात वर्षों से प्रदूषण-मुक्त नदी खंड (पीआरएस) का रिकॉर्ड बनाए हुए है। यह जानकारी ‘नमामि गंगे’ से संबंधित रिपोर्ट से मिली है।
गंगा बेसिन के पांच राज्यों में झारखंड शामिल है।
केंद्र के इस प्रमुख नदी संरक्षण कार्यक्रम के तहत झारखंड के प्रदर्शन का उल्लेख करते हुए ‘नमामि गंगे’ ने कहा कि इस राज्य का मॉडल इसलिए अलग है, क्योंकि इसमें दूषित नदी के किसी हिस्से के पुनरुद्धार के बजाय प्रदूषण रोकने पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
‘नमामि गंगे’ ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट में कहा, ‘‘जहां अधिकतर नमामि गंगे अभियान की कहानियां सफाई से जुड़ी होती हैं, वहीं झारखंड में नदी को गंदा होने से रोका जाता है।’’
इसने कहा, ‘‘वर्ष 2018 में, सीपीसीबी को झारखंड से गुजरने वाली गंगा की मुख्यधारा प्रदूषण-मुक्त मिली थी और नमामि गंगा अभियान के सात साल बाद 2025 में भी, इसमें प्रदूषण नहीं मिला। राज्य ने इस दिशा में दृढ़ संकल्प दिखाया है।’’
नमामि गंगा के अनुसार, झारखंड में दूषित हिस्से का पुनरुद्धार करने के बजाय गंगा की मुख्यधारा को स्वच्छ बनाए रखने पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। इसके साथ ही सहायक नदियों और औद्योगिक अपशिष्ट से होने वाले प्रदूषण की रोकथाम पर कार्य जारी है।
इस संदर्भ में साझा किए गए एक ग्राफिक के अनुसार, राज्य में गंगा की स्वच्छता बनाए रखने के लिए 261.5 मिलियन लीटर प्रतिदिन (एमएलडी) की स्वीकृत शोधन क्षमता और कुल 1,310 करोड़ रुपये के परिव्यय वाली पांच मलजल शोधन परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है।
इसके अनुसार, इन पांच स्वीकृत परियोजनाओं में से तीन पहले ही पूरी हो चुकी हैं। स्वीकृत 261.5 एमएलडी शोधन क्षमता में से, गंगा तट के किनारे अब तक 29.5 एमएलडी क्षमता का निर्माण हो चुका है।
रिपोर्ट के अनुसार, 2025-26 में फुसरो मलजल शोधन परियोजना के पूरा होने का उल्लेख किया गया है, जिससे 61.05 करोड़ रुपये की स्वीकृत लागत पर 14 एमएलडी शोधन क्षमता का विस्तार हुआ।
भाषा अमित सुरेश
सुरेश

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