नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा : कलाकार परेश मैती की बेजोड़ कला ने भारत की भावना पिरोई
नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा : कलाकार परेश मैती की बेजोड़ कला ने भारत की भावना पिरोई
नयी दिल्ली, 27 मई (भाषा) नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा पहली झलक में कांच और स्टील से बना प्रौद्योगिकी आधारित एक अत्याधुनिक परिसर प्रतीत होता है। हालांकि, जब आप हवाई अड्डा परिसर में दाखिल होते हैं, तो इसकी एक अलग छवि उभरकर सामने आती है, जो प्रख्यात कलाकार परेश मैती की जीवंत कलाकृतियों के जरिये भारत और उत्तर प्रदेश की कला, संस्कृति एवं भावना को प्रदर्शित करती है।
नोएडा हवाई अड्डे पर 15 जून को यात्री उड़ानों का परिचालन शुरू होने से पहले परिसर को अंतिम रूप दिया जा रहा है। मैती की दो भव्य कलाकृतियां हवाई अड्डे के आलीशान टर्मिनल को सांस्कृतिक रूप से जीवंत बनाती हैं।
हवाई अड्डे में ‘चेक-इन’ करते ही यात्रियों की नजर ‘जागृति’ पर पड़ेगी, जो भारत के प्रतिष्ठित सांस्कृतिक और आध्यात्मिक स्थलों को एक जीवंत दृश्य कथा के रूप में पेश करने वाली मैती की 8 फुट लंबी और 100 फुट चौड़ी ‘एक्रिलिक-ऑन-कैनवास’ कलाकृति है।
आपस में जुड़े छह पैनल पर उकेरी गई इस कलाकृति में गंगा, यमुना, सरस्वती और सरयू जैसी पवित्र नदियों तथा सदियों से उनके किनारों पर फले-फूले तीर्थ स्थलों और ऐतिहासिक शहरों को दर्शाया गया है।
कलाकृति की शुरुआत में वाराणसी के जीवंत घाट दिखाए गए हैं, जो गंगा के किनारे बहने वाली श्रद्धा और भक्ति की अविरल धारा का प्रतीक हैं। इसके बाद सारनाथ के धमेक स्तूप का चित्र नजर आता है, जहां गौतम बुद्ध ने अपना पहला उपदेश दिया था। इस स्थान को बुद्ध की आध्यात्मिक जागृति का केंद्र माना जाता है।
कलाकृति में आगरा में यमुना नदी के किनारे बने ताज महल का सूर्योदय के समय का जगमगाता दृश्य भी उकेरा गया है। इसमें मथुरा और वृंदावन में भगवान कृष्ण से जुड़े कुसुम सरोवर के शीतल जल और सरयू नदी के तट पर बसी राम की जन्मभूमि अयोध्या के दृश्यों को भी दर्शाया गया है। कलाकृति के अंत में महाकुंभ का दृश्य उकेरा गया है, जिसे दुनिया का सबसे बड़ा तीर्थ जमावड़ा माना जाता है।
मैती ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, “कलाकृति की अवधारणा तैयार करने से लेकर इसे कैनवास पर उतारने तक की प्रक्रिया में दो साल का समय लग गया। चूंकि, यह हवाई अड्डा उत्तर प्रदेश में है, इसलिए उस राज्य पर केंद्रित कलाकृति बनाने का इरादा था। यह कलाकृति भारतीय दर्शन और सौंदर्यशास्त्र में गहराई से निहित है और ‘षडांग’ (छह अंगों) पर आधारित है। यही कारण है कि इसे छह पैनल में विभाजित किया गया है।”
उन्होंने कहा, “कलाकृति की अवधारणा सूर्योदय पर आधारित है, जो जागृति का प्रतीक है। वहीं, रंग योजना पूरी तरह से सुबह को दर्शाने वाले जगमगाते रंगों पर आधारित है, जो इसके प्रकाश और शुरुआत का प्रतीक होने का एहसास कराती है।”
‘पद्मश्री’ से सम्मानित मैती कई ऐतिहासिक सार्वजनिक कला परियोजनाओं के लिए जाने जाते हैं, जिनमें दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के टर्मिनल-3 पर बनाए गए दुनिया के सबसे लंबे भित्ति चित्रों में से एक ‘द इंडियन ओडिसी’ और टर्मिनल-1 पर मौजूद पीतल और तांबे की 4,000 घंटियों से बनी ‘साउंड ऑफ साइलेंस’ शामिल हैं।
नोएडा हवाई अड्डे पर लगाई गई मैती की दूसरी कलाकृति ‘मिस्टिक अबोड’ है, जो पीतल की 8,500 से अधिक घंटियों से बनी मकान के आकार की कलाकृति है।
मैती के मुताबिक, 2016 में स्विट्जरलैंड में पहली बार प्रदर्शित यह कलाकृति यात्रियों को शहर के शोरगुल भरे जीवन में दुर्लभ शांति और आंतरिक सुकून का एहसास कराती है।
उन्होंने कहा, “चूंकि, हम एक बेहद अनिश्चित और डरावनी दुनिया में जी रहे हैं… यह (कलाकृति) एक ऐसा माध्यम है, जहां आप सचमुच अपने भीतर झांक सकते हैं। यहां आपको शांति मिलेगी-मन और आत्मा की शांति। दुनिया ऐसी ही होनी चाहिए। घंटी सकारात्मक ऊर्जा लाती है; यह नकारात्मक ऊर्जा को दूर करती है। इसी अवधारणा के साथ इस कलाकृति को तैयार किया गया है।”
छत से लेकर सीढ़ियों तक, नोएडा हवाई अड्डे की स्थापत्य कला एक सहज प्रवाह वाली डिजाइन शैली पर आधारित है। परिसर में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लाल ग्रेनाइट से बने क्षेत्रीय स्मारकों जैसे ढांचे, वाराणसी के घाटों से प्रेरित सीढ़ियां और पारंपरिक हवेलियों में पाए जाने वाले ‘आंगन’ जैसे क्षेत्र भी दिखाई देंगे।
भाषा पारुल प्रशांत
प्रशांत

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