अधिकारी सांसदों के पत्रों का जवाब नहीं देते : रास में कांग्रेस के प्रमोद तिवारी का आरोप

अधिकारी सांसदों के पत्रों का जवाब नहीं देते : रास में कांग्रेस के प्रमोद तिवारी का आरोप

अधिकारी सांसदों के पत्रों का जवाब नहीं देते : रास में कांग्रेस के प्रमोद तिवारी का आरोप
Modified Date: March 30, 2026 / 02:46 pm IST
Published Date: March 30, 2026 2:46 pm IST

नयी दिल्ली, 30 मार्च (भाषा) जनसमस्याओं के बारे में संसद सदस्यों द्वारा अधिकारियों को लिखे गए पत्रों और फोन कॉल का जवाब नहीं मिलने पर क्षोभ व्यक्त करते हुए राज्यसभा में सोमवार को कांग्रेस सदस्य प्रमोद तिवारी ने इस बारे में अधिकारियों को जवाबदेह ठहराने की मांग की।

शून्यकाल में यह मुद्दा उठाते हुए तिवारी ने कहा कि संविधान के 75वें अनुच्छेद में मंत्रिपरिषद को सदन के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी कहा गया है। ‘‘लोकतंत्र में सदन सर्वोच्च है लेकिन सांसद अधिकारियों को पत्र लिखते हैं तो न जवाब समय पर मिलता है और न ही फोन कॉल आते हैं।’’

उन्होंने कहा ‘‘संसद सदस्य जनता के निर्वाचित प्रतिनिधि होते हैं। हम अपने लिए नहीं बल्कि अपने निर्वाचन क्षेत्र और जनता की समस्याओं को लेकर अधिकारियों को पत्र लिखते हैं। उन्हें डीओपीटी ने कई बार पंद्रह दिन में पत्र लिखने और समय पर फोन कॉल रिसीव नहीं कर पाने पर बाद में फोन कॉल करने के निर्देश दिए हैं। लेकिन ऐसा नहीं होता।’’

तिवारी ने दावा किया ‘‘हम ही नहीं, इस समस्या से कुछ मंत्री भी परेशान हैं, भले ही वे बोलते नहीं।’’

उन्होंने मांग की कि डीओपीटी के दिशानिर्देश पर नियमावली तैयार की जानी चाहिए और अधिकारियों को समय पर पत्रों का जवाब देने के लिए कहा जाना चाहिए। जवाब न देने वाले अधिकारियों को जवाबदेह ठहराने की मांग करते हुए तिवारी ने कहा कि एक डिजिटल निगरानी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए ताकि पता चले कि हमारे पत्रों का आखिर क्या हुआ।

तिवारी ने कहा ‘‘आपकी पीठ से ही अगर यह निर्देश दे दिया जाए कि अधिकारी सांसदों के पत्रों तथा फोन कॉल का समय पर जवाब दें तो भी बेहतर होगा।’’

भाषा

मनीषा अविनाश

अविनाश


लेखक के बारे में