स्थापना दिवस पर राज्यपाल परनायक ने 17 माउंटेन डिवीजन की रणनीतिक भूमिका को रेखांकित किया
स्थापना दिवस पर राज्यपाल परनायक ने 17 माउंटेन डिवीजन की रणनीतिक भूमिका को रेखांकित किया
ईटानगर, 12 जनवरी (भाषा) अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) के टी परनायक ने सोमवार को भारतीय सेना की ’17 माउंटेन डिवीजन’ को पूर्वोत्तर का संरक्षक और सिलीगुड़ी गलियारे का प्रहरी बताया। उन्होंने अधिकारियों और सैनिकों से उभरती सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए तकनीक और नवाचार को अपनाने का आह्वान किया।
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, गंगटोक सैन्य छावनी में डिवीजन के 65वें स्थापना दिवस पर आयोजित ‘सैनिक सम्मेलन’ को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कृत्रिम मेधा (एआई), ड्रोन, आधुनिक निगरानी प्रणाली और साइबर क्षमताओं जैसी उभरती तकनीकों की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने विशेष रूप से ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद के बदलते सुरक्षा परिदृश्य में इन प्रौद्योगिकियों को अनिवार्य बताया। परनायक ने फुर्ती, नवाचार, निरंतर सीखने और ‘धारणा प्रबंधन’ की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने डिवीजन से अपील की कि वह महत्वपूर्ण क्षेत्रों की सुरक्षा के साथ-साथ लोगों का दिल जीतने के लिए ‘ऑपरेशन सद्भावना’ और सैन्य-नागरिक एकीकरण जैसी जन-केंद्रित पहल को और मजबूत करे।
राज्यपाल ने बल की गौरवशाली विरासत, असाधारण पेशेवर दक्षता और कर्तव्य के प्रति अटूट समर्पण की सराहना की।
अधिकारियों और सैनिकों के प्रति गहरा विश्वास व्यक्त करते हुए परनायक ने कहा कि देश की जनता उनके साहस, अनुशासन और नैतिक बल पर पूर्ण भरोसा करती है।
उन्होंने विश्वास जताया कि यह डिवीजन अपनी शानदार विरासत को बनाए रखेगी और एक मजबूत, सुरक्षित व आत्मनिर्भर ‘विकसित भारत’ के दृष्टिकोण में निर्णायक योगदान देगी।
राज्यपाल ने सभी जवानों, पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को शुभकामनाएं दीं और डिवीजन से हमेशा ‘स्वयं से पहले देश’ को रखने तथा तिरंगा के प्रति अटूट विश्वास के साथ आगे बढ़ने का आग्रह किया।
डिवीजन कमांडर के रूप में अपने कार्यकाल को याद करते हुए परनायक ने 2006 में व्यापार के लिए ‘नाथू ला’ दर्रा खोलने जैसी ऐतिहासिक पहल और सिक्किम में विकास, पर्यटन व सामुदायिक कल्याण को बढ़ावा देने में डिवीजन की भूमिका का उल्लेख किया।
भाषा सुमित नरेश अविनाश
अविनाश

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