बंगाल में सिर्फ घुसपैठियों का स्वागत: भाजपा ने राष्ट्रपति के ‘अपमान’ को लेकर ममता की आलोचना की
बंगाल में सिर्फ घुसपैठियों का स्वागत: भाजपा ने राष्ट्रपति के 'अपमान' को लेकर ममता की आलोचना की
नयी दिल्ली, आठ मार्च (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने रविवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के बारे में ममता बनर्जी की टिप्पणी को लेकर निशाना साधा और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री से कहा कि अगर वह देश की राष्ट्रपति का ‘‘सम्मान नहीं कर सकतीं’’ तो संविधान बचाने की बात करना बंद कर दें।
भाजपा के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद ने यहां पार्टी मुख्यालय में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘ममता बनर्जी के शासन में केवल ‘घुसपैठिये’ का स्वागत किया जाता है। उनके लिए दरवाजे खुले हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘राष्ट्रपति का करे अपमान और घुसपैठियों को बनाये मेहमान।’’
बनर्जी ने शनिवार को राष्ट्रपति मुर्मू पर भाजपा के इशारे पर बोलने का आरोप लगाते हुए मणिपुर एवं छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में आदिवासियों के खिलाफ हो रहे ‘‘अत्याचारों’’ पर उनकी ‘‘चुप्पी’’ पर सवाल उठाया।
राष्ट्रपति ने शनिवार को सिलीगुड़ी के पास आयोजित अपने कार्यक्रम के स्थान में बदलाव किए जाने और उनके दौरे के दौरान मुख्यमंत्री या किसी वरिष्ठ मंत्री की अनुपस्थिति पर नाराजगी जताई थी।
प्रसाद ने इस पर पलटवार करते हुए कहा, ‘वह (ममता बनर्जी) कह रही हैं कि अगर राष्ट्रपति मुर्मू का दौरा दो दिन की सूचना पर होगा तो वह क्या कर सकती हैं। यह उनका जवाब है।’
भाजपा नेता ने सवाल किया, ‘‘यह कैसी प्रतिक्रिया है? क्या भारत की राष्ट्रपति एक आदिवासी महिला के प्रति उनका यही सम्मान है?’ उन्होंने कहा, ‘यह बेहद शर्मनाक और निंदनीय है।’’
प्रसाद ने कहा, ‘‘मैं ममता जी से निवेदन करता हूं कि अगर वह भारत की राष्ट्रपति का सम्मान नहीं कर सकतीं, जो सशस्त्र बलों की सर्वोच्च कमांडर होने के साथ-साथ संवैधानिक प्रमुख भी हैं, तो उन्हें संविधान के खतरे में होने की बात करना बंद कर देना चाहिए। वह (मुर्मू) आदिवासी समुदाय से आती हैं।’
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने बनर्जी पर पश्चिम बंगाल में ‘तानाशाही’ चलाने का भी आरोप लगाया। उन्होंने आरोप लगाया, ‘ममता बनर्जी की तानाशाही इतनी बढ़ गई है कि वे खुद को कानून से ऊपर समझने लगी हैं। यह ठीक नहीं है। देश लोकतंत्र, गरिमा और संस्थाओं के सम्मान के साथ चलता है। लेकिन उन्होंने हर संस्था की अवहेलना करने का फैसला कर लिया है।’
भाषा अमित नरेश
नरेश

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