संसद परिसर में विपक्ष का प्रदर्शन, एसआईआर लिखे पोस्टर फाड़कर कूड़ेदान में डाले

संसद परिसर में विपक्ष का प्रदर्शन, एसआईआर लिखे पोस्टर फाड़कर कूड़ेदान में डाले

संसद परिसर में विपक्ष का प्रदर्शन, एसआईआर लिखे पोस्टर फाड़कर कूड़ेदान में डाले
Modified Date: July 25, 2025 / 12:37 pm IST
Published Date: July 25, 2025 12:37 pm IST

नयी दिल्ली, 25 जुलाई (भाषा) विपक्षी गठबंधन ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस’ (इंडिया) के कई घटक दलों के सांसदों ने बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के खिलाफ शुक्रवार को संसद भवन परिसर में मार्च किया और प्रतीकात्मक विरोध करते हुए एसआईआर लिखे पोस्टर फाड़कर कूड़ेदान में डाले।

विपक्ष के नेताओं ने महात्मा गांधी की प्रतिमा से संसद भवन के ‘मकर द्वार’ तक मार्च निकाला।

इस विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस नेता एवं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल और कई अन्य दलों के सांसद शामिल हुए।

संसद परिसर में ही विपक्षी नेताओं ने प्रतीकात्मक विरोध करते हुए एक कूड़ेदान रखा और फिर एसआईआर लिखे पोस्टर फाड़कर उसमें डाले। खरगे, राहुल गांधी और कई अन्य सांसदों ने भी ऐसा किया।

विपक्षी सांसदों ने एक बड़ा बैनर भी ले रखा था, जिस पर ‘एसआईआर- लोकतंत्र पर वार’ लिखा हुआ था। उन्होंने ‘एसआईआर वापस लो’ और ‘तानाशाही नहीं चलेगी’ के नारे लगाये।

विपक्षी सांसदों की मांग है कि इस विषय पर संसद में चर्चा होनी चाहिए।

खरगे ने आरोप लगाया कि सरकार गरीबों का मताधिकार छीनना चाहती है और रसूखदार लोगों को ही मताधिकार देना चाहती है।

उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘जब बाबासाहेब आंबेडकर जी और पंडित जवाहरलाल नेहरू जी ने देश के सभी लोगों के लिए मतदान सुनिश्चित किया, तो कहा था कि हमें बिना किसी भेदभाव के सभी को यह ताकत देनी चाहिए।’’

कांग्रेस अध्यक्ष ने दावा किया, ‘‘आज भाजपा जिस गलत तरीके से मतदाता सूची का संशोधन करने की कोशिश कर रही है, वो बहुत बुरी बात है। इससे लोकतंत्र को नुकसान होता है, देश का नुकसान होता है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘आज चुनाव आयोग ने एक परिपत्र जारी किया है कि एसआईआर सिर्फ बिहार के लिए नहीं है, वे पूरे देश में मतदाता सूचियों का पुनरीक्षण करेंगे। यह बात उचित नहीं है।’’

भाषा हक

हक वैभव

वैभव


लेखक के बारे में