‘दुर्भावनापूर्ण अभियोजन’ के लिए सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी को पांच लाख रुपये का हर्जाना देने का आदेश

‘दुर्भावनापूर्ण अभियोजन’ के लिए सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी को पांच लाख रुपये का हर्जाना देने का आदेश

‘दुर्भावनापूर्ण अभियोजन’ के लिए सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी को पांच लाख रुपये का हर्जाना देने का आदेश
Modified Date: March 3, 2026 / 05:01 pm IST
Published Date: March 3, 2026 5:01 pm IST

कोल्लम (केरल), तीन मार्च (भाषा) केरल की एक अदालत ने पुलिस द्वारा ‘दुर्भावनापूर्ण अभियोजन’ के लिए हर्जाने के तौर पर एक सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी को पांच लाख रुपये देने का आदेश दिया।

प्रधान मुंसिफ रागी एस. ने राज्य सरकार और उसके छह पुलिस अधिकारियों को संयुक्त रूप से 54-वर्षीय सेवानिवृत्त नायक सूबेदार विलिंगटन को ‘अवैध रूप से हिरासत में लेने, उत्पीड़न और दुर्भावनापूर्ण अभियोजन’ के लिए मुआवजा देने का निर्देश दिया।

सेवानिवृत्त अधिकारी को 2013 में एक आपराधिक मामले में फंसाया गया था, लेकिन उन्हें तिरुवनंतपुरम रेंज के पुलिस महानिरीक्षक द्वारा आदेशित पुन: जांच के बाद 2017 में दोषमुक्त कर दिया गया था।

मुंसिफ अदालत ने केरल विधान सचिवालय के उस आधिकारिक पत्र पर भरोसा करते हुए वादी सैन्य अधिकारी के पक्ष में फैसला सुनाया, जिसमें कहा गया था कि उन्हें (अधिकारी को) अवैध हिरासत में रखा गया और उनके खिलाफ दुर्भावनापूर्ण अभियोग लगाया गया।

अदालत ने कहा, ‘‘…अभियोजन की स्वीकारोक्ति से यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि प्रतिवादियों (छह पुलिस अधिकारियों) की कार्रवाई अवैध रूप से अनाधिकार प्रवेश, अधिकार के दुरुपयोग और दुर्भावनापूर्ण गिरफ्तारी के बराबर है, जो वादी को बिना किसी गलती के परेशान करने के दुर्भावनापूर्ण इरादे से की गई थी।’’

विलिंगटन का प्रतिनिधित्व कर रहे अधिवक्ता एस आर प्रशांत और वायनकाम के. सोमशेखरन पिल्लई ने आरोप लगाया था कि चार मार्च, 2013 की रात को पुलिस की एक टीम किझाक्केकल्लाडा स्थित सेवानिवृत्त सैनिक के आवास में सामने का फाटक और मुख्य दरवाजा तोड़कर जबरन घुस गई।

उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मियों ने सेवानिवृत्त अधिकारी की पत्नी और बच्चों के सामने उनपर हमला किया, उनके घर की तलाशी ली, दो पालतू खरगोशों को मार डाला और उनके कुएं को तारपीन से दूषित कर दिया।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सेवानिवृत्त अधिकारी को जबरन पूर्वी कल्लाडा पुलिस थाने ले जाया गया, जहां उन्हें दो दिनों तक अवैध रूप से केवल अंतर्वस्त्रों में हिरासत में रखा गया और उनके परिवार को उनसे मिलने नहीं दिया गया।

सेवानिवृत्त सेना अधिकारी ने दावा किया था कि बाद में उन्हें झूठे आरोप में फंसाया गया और उनपर अपने भाई को शरण देने का आरोप लगाया गया, जो एक अन्य मामले में वांछित था।

अदालत ने आदेश में कहा कि विलिंगटन प्रतिवादियों से हर्जाने के रूप में 5,00,000 रुपये पाने के हकदार हैं। इसके अलावा उन्हें मुकदमे की तारीख से वसूली तक इस राशि पर छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज की दर से ब्याज भी देय होगा।

भाषा संतोष सुरेश

सुरेश


लेखक के बारे में