अयोग्यता मामले में पलानीस्वामी और पूर्व विधायकों को विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष पेश होने को कहा गया

अयोग्यता मामले में पलानीस्वामी और पूर्व विधायकों को विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष पेश होने को कहा गया

अयोग्यता मामले में पलानीस्वामी और पूर्व विधायकों को विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष पेश होने को कहा गया
Modified Date: July 27, 2026 / 01:38 pm IST
Published Date: July 27, 2026 1:38 pm IST

चेन्नई, 27 जुलाई (भाषा) अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) के प्रमुख एडप्पादी के. पलानीस्वामी और उनकी पार्टी के चार पूर्व विधायकों को 30 जुलाई को तमिलनाडु विधानसभा अध्यक्ष जे. सी. डी. प्रभाकर के समक्ष पेश होने के लिए कहा गया है। एक अधिकारी ने सोमवार को बताया कि यह सुनवाई दल-बदल विरोधी कानून के तहत चारों पूर्व विधायकों की अयोग्यता से जुड़े मामले में होगी।

चारों विधायक-मरगथम कुमारवेल (मदुरांतकम विधानसभा क्षेत्र), पी. सत्यबामा (धारापुरम), एस. जयकुमार (पेरुंदुरई) और एसक्की सुबैया (अंबासमुद्रम) चुनाव जीतने के एक महीने से भी कम समय के भीतर अन्नाद्रमुक छोड़कर सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) में शामिल हो गए थे।

एक अधिकारी के अनुसार, विधानसभा सचिवालय की ओर से विधानसभा सचिव आर. शांति ने 24 जुलाई को समन जारी किए थे। इसमें अध्यक्ष के आदेश का हवाला देते हुए चारों को विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष अलग-अलग पेश होकर अपना पक्ष स्पष्ट करने को कहा गया है।

सदन में अन्नाद्रमुक के नेता पलानीस्वामी ने संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत मरगथम कुमारवेल, सत्यबामा, जयकुमार और एसक्की सुबैया के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि इन विधायकों ने पार्टी के टिकट पर चुनाव जीतने के बाद विधायक पद से इस्तीफा दिया और सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) में शामिल हो गए।

चारों विधायकों में से प्रत्येक को अपना पक्ष रखने के लिए पूर्वाह्न 11 बजे से दोपहर 12.30 बजे के बीच अलग-अलग समय निर्धारित किया गया है।

ये चारों उन 25 बागी अन्नाद्रमुक विधायकों में शामिल थे, जिन्होंने पार्टी के निर्देशों की अवहेलना करते हुए 13 मई को हुए विश्वास मत परीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) सरकार के पक्ष में मतदान किया था।

बाद में, अन्नाद्रमुक के महासचिव पलानीस्वामी ने 21 विधायकों को पार्टी में वापस स्वीकार कर लिया, क्योंकि उन्होंने मतभेद दूर कर उनके नेतृत्व में काम करने पर सहमति जताई थी। हालांकि, उन्होंने इन चार विधायकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग जारी रखी।

भाषा तान्या वैभव

वैभव


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