‘पश्चिमबंग दिवस’ सिर्फ तारीख नहीं, उस संघर्ष की याद है जिसने बंगाल को भारत का हिस्सा बनाए रखा : मोदी

'पश्चिमबंग दिवस' सिर्फ तारीख नहीं, उस संघर्ष की याद है जिसने बंगाल को भारत का हिस्सा बनाए रखा : मोदी

‘पश्चिमबंग दिवस’ सिर्फ तारीख नहीं, उस संघर्ष की याद है जिसने बंगाल को भारत का हिस्सा बनाए रखा : मोदी
Modified Date: June 20, 2026 / 08:28 pm IST
Published Date: June 20, 2026 8:28 pm IST

(तस्वीरों के साथ)

तारकेश्वर, 20 जून (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को बंगाल के बंटवारे के दौर के इतिहास और श्यामा प्रसाद मुखर्जी की विरासत का जिक्र करते हुए कहा कि 20 जून एक अहम मोड़ था, जिसने यह सुनिश्चित किया कि पश्चिम बंगाल भारत का हिस्सा बना रहे।

मोदी ने आरोप लगाया कि बंटवारे के समय पूरे अविभाजित बंगाल को पाकिस्तान में शामिल करने की कोशिशें की गई थीं।

तारकेश्वर में विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करने के बाद ‘पश्चिमबंग दिवस’ के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री ने इतिहास और मौजूदा राजनीति को जोड़ने की कोशिश की। उन्होंने राज्य में हाल ही में हुए राजनीतिक बदलाव को उन आकांक्षाओं का ही अगला चरण बताया, जिन्होंने 1947 में ‘‘पश्चिम बंगाल के गठन को आकार दिया था’’।

कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए मोदी ने आरोप लगाया कि बंटवारे के समय वह ‘‘साजिश रचने वाली ताकतों के आगे झुक गई’’ थी और बाद में उसने ‘पश्चिमबंग दिवस’ के इतिहास और महत्व को मिटाने की कोशिश की।

उन्होंने दावा किया कि राजनीतिक कारणों से बंगाल के अतीत को ‘‘छिपाने’’ की कोशिश की गई थी।

मोदी ने कहा, ‘‘हमें बार-बार ‘पश्चिमबंग दिवस’ के महत्व को रेखांकित करने की आवश्यकता है। युवा पीढ़ी के लिए यह जानना महत्वपूर्ण है कि उस दौरान क्या हुआ था।’’

बंगाल के इतिहास में 20 जून को एक अहम मोड़ बताते हुए मोदी ने कहा कि इस दिन को मनाने का मकसद सिर्फ कैलेंडर पर एक तारीख को याद करना नहीं, बल्कि ‘‘इतिहास के एक पूरे अध्याय’’ को याद करना है।

बीस जून 1947 को, अविभाजित बंगाल के हिंदू-बहुल जिलों के जनप्रतिनिधियों ने बंटवारे और भारतीय संघ में शामिल होने के पक्ष में वोट दिया; इसी घटनाक्रम ने आगे चलकर पश्चिम बंगाल के गठन का रास्ता साफ किया।

भारतीय जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी को श्रद्धांजलि देते हुए मोदी ने उन्हें ‘बंगाली हिंदू मातृभूमि’ आंदोलन का नेतृत्व करने का श्रेय दिया। इस आंदोलन ने बंटवारे के दौरान पूरे बंगाल को पाकिस्तान में शामिल करने के प्रस्तावों का विरोध किया था।

मुखर्जी बंटवारे के समय हिंदू महासभा से जुड़े हुए थे।

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘जब पूरे बंगाल को पाकिस्तान का हिस्सा बनाने की कोशिशें हो रही थीं, तब कांग्रेस ने साजिश रचने वाली ताकतों के सामने घुटने टेक दिए थे। तभी श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने इसके खिलाफ आवाज उठाई थी।’’

उन्होंने कहा कि मुखर्जी ने कई जाने-माने लोगों के साथ मिलकर जनमत तैयार किया और एक ऐसे आंदोलन का नेतृत्व किया, जिसके परिणामस्वरूप पश्चिम बंगाल का गठन हुआ।

मोदी ने कहा, ‘‘जब पूरे बंगाल को भारत से अलग करने की साजिश रची गई, तो उन मंसूबों को नाकाम करने के लिए एक अलग पश्चिम बंगाल बनाया गया।’’

उन्होंने कहा कि बंगाल की सभ्यता और सांस्कृतिक विरासत को बचाए रखने के लिए राज्य का भारत के साथ बने रहना जरूरी था।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘‘हजारों साल पुरानी सभ्यता और संस्कृति, साथ ही इस क्षेत्र की मुख्य आस्था और परंपराएं, आज पश्चिम बंगाल के रूप में सुरक्षित हैं क्योंकि वे कोशिशें नाकाम हो गई थीं।’’

बंटवारे के दर्द को याद करते हुए मोदी ने कहा कि बंगाल ने खून-खराबे और विस्थापन की भारी कीमत चुकाई, लेकिन अपनी पहचान बनाए रखने में कामयाब रहा।

उन्होंने कहा, ‘‘बंगाल ने बंटवारा देखा। उसने अपनी मातृभूमि को बंटते हुए देखा। फिर भी, बंगाल ने अपनी सांस्कृतिक पहचान और विरासत को मिटने नहीं दिया।’’

मोदी ने यह भी आरोप लगाया कि राजनीतिक कारणों से पश्चिम बंगाल के गठन से जुड़े आंदोलन के महत्व को दशकों तक जान-बूझकर कम करके दिखाया गया।

उन्होंने कहा, ‘‘जिस भावना के साथ पश्चिम बंगाल को बचाया गया था, उसी भावना का इस्तेमाल उसे आगे ले जाने के लिए किया जाना चाहिए था। लेकिन, इसके उलट हुआ। ‘पश्चिमबंग दिवस’ और उसके पीछे की भावना के इतिहास और महत्व को मिटाने की कोशिशें की गईं। राजनीतिक एजेंडे के कारण इतिहास को मिटाने की कोशिश की गई।’’

कांग्रेस पर कड़ा हमला करते हुए प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया कि पार्टी ने बंटवारे के समय बंगाल को बेसहारा छोड़ दिया था और बाद में तुष्टीकरण की राजनीति की।

उन्होंने यह भी दावा किया कि वैचारिक कारणों से मुखर्जी के योगदान को नजरअंदाज किया गया।

मोदी ने कहा, ‘‘श्यामा प्रसाद मुखर्जी जनसंघ के संस्थापक थे, इसलिए उनके योगदान को नजरअंदाज किया गया। जिस विचारधारा के लिए उन्होंने बंगाल में लड़ाई लड़ी थी, उसी विचारधारा को खत्म करने की कोशिशें की गईं।’’

किसी भी पार्टी का नाम लिए बिना, प्रधानमंत्री ने राज्य की पिछली सरकारों की आलोचना की।

मोदी ने आरोप लगाया, ‘‘पहले कांग्रेस, फिर वामपंथी और फिर तृणमूल कांग्रेस – दशकों तक पश्चिम बंगाल को संवारने और सुरक्षित रखने के बजाय, इसे घुसपैठियों का अड्डा बनने दिया गया।’’

भाजपा सरकार के मौजूदा एजेंडे और पश्चिम बंगाल के गठन के पीछे की मूल सोच के बीच संबंध बताते हुए, मोदी ने कहा कि राज्य में हालिया राजनीतिक बदलाव को देखते हुए इस साल के ‘पश्चिमबंग दिवस’ का महत्व और बढ़ गया है।

उन्होंने कहा, ‘‘इस बार ‘पश्चिमबंग दिवस’ और भी खास है। आजादी के बाद बंगाल के उज्ज्वल भविष्य के लिए जो सपना देखा गया था, बंगाल की महान विभूतियों ने जो परिकल्पना की थी, आज हम उन सपनों को सच होते हुए देख रहे हैं।’’

लोगों से राज्य के इतिहास से प्रेरणा लेने का आग्रह करते हुए मोदी ने कहा, ‘‘यह ऐतिहासिक तारीख पश्चिम बंगाल के विकास के लिए प्रेरणा बने। आइए, हम एक नया और शानदार इतिहास रचें। आज हमें यह संकल्प लेना होगा कि अतीत की गलतियां दोबारा नहीं दोहराई जाएंगी।’’

भाषा शफीक माधव

माधव


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