शांति स्थापना कोई नियमित कार्य नहीं, बदलाव के लिए रचनात्मकता और समावेशिता की आवश्यकता: मेजर स्वाति
शांति स्थापना कोई नियमित कार्य नहीं, बदलाव के लिए रचनात्मकता और समावेशिता की आवश्यकता: मेजर स्वाति
नयी दिल्ली, आठ मार्च (भाषा) दक्षिण सूडान के मलाकाल में लैंगिक हिंसा से निपटने के लिए संयुक्त राष्ट्र द्वारा सम्मानित भारतीय सेना की अधिकारी मेजर स्वाति शांतकुमार का कहना है कि शांति स्थापना ‘कोई एक बार किया जाने वाला या नियमित कार्य नहीं है’, बल्कि वास्तविक बदलाव लाने के लिए इसमें रचनात्मकता और समावेशिता की आवश्यकता होती है।
मेजर स्वाति शांतकुमार ने ‘यूनाइटेड नेशन मिशन इन साउथ सूडान’ के तहत मलाकाल में 18 महीनों तक एक महिला सैन्य सहभागिता दल का नेतृत्व किया था। मेजर स्वाति ने ‘पीटीआई-वीडियो’ सेवा से बातचीत करते हुए संघर्षग्रस्त दक्षिण सूडान में शांति स्थापना अभियान में अपने अनुभव साझा किए।
उन्होंने बताया कि कैसे ‘समान भागीदार, स्थायी शांति’ पहल के तहत उनकी टीम के काम ने विश्वास कायम करने, सुरक्षित स्थान बनाने और स्थानीय महिलाओं द्वारा सामना किए जाने वाले गंभीर मुद्दों को हल करने में मदद की।
सैन्य अधिकारी ने बताया, “जैसे-जैसे विश्वास बढ़ा, महिलाओं ने संघर्ष से संबंधित यौन हिंसा सहित गंभीर मुद्दों को साझा करना शुरू कर दिया, जो महिलाओं, पुरुषों और यहां तक कि बच्चों को भी प्रभावित कर रहे थे।”
मेजर स्वाति ने कहा, “हमने आगे की सहायता के लिए इन मुद्दों की जानकारी बाल संरक्षण इकाई और लैंगिक प्रकोष्ठ को दी।”
उन्होंने बताया कि सुरक्षित संपर्क बनाए रखने के लिए टीम ने आपातकालीन नंबरों वाले सुरक्षा संपर्क कार्ड वितरित किए और व्हाट्सऐप पर एक समूह बनाया, जो गांव की महिला नेताओं को सीधे शांतिरक्षकों से जोड़ता था।
मेजर स्वाति ने बताया कि महिलाओं के लिए सुरक्षित स्थान भी बनाए गए, जहां वे इकट्ठा हो सकें, अपनी चिंताओं पर चर्चा कर सकें और सहायता प्राप्त कर सकें।
संयुक्त राष्ट्र की वेबसाइट के अनुसार, दक्षिण सूडान में संयुक्त राष्ट्र के सबसे बड़े शांति अभियानों में से एक ‘यूनाइटेड नेशन मिशन इन साउथ सूडान’ का संचालन होता है, जिसमें लगभग 75 देशों के लगभग 20,000 कर्मचारी (सैन्य, पुलिस और नागरिक कर्मी) शामिल हैं।
वेबसाइट पर मौजूद जानकारी के मुताबिक, रवांडा, भारत, नेपाल और बांग्लादेश जैसे देश दक्षिण सूडान को युद्ध की गहरी व जटिल पृष्ठभूमि से उबरने में मदद करने के लिए सबसे अधिक संख्या में सैनिक प्रदान करते हैं।
भाषा जितेंद्र दिलीप
दिलीप

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