‘अल्पसंख्यकों’ की स्थिति के बारे में याचिका: न्यायालय ने याचिकाकर्ता से ठोस उदाहरण मांगे
'अल्पसंख्यकों' की स्थिति के बारे में याचिका: न्यायालय ने याचिकाकर्ता से ठोस उदाहरण मांगे
नयी दिल्ली, 18 जुलाई (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को एक याचिकाकर्ता से कहा कि वह इस बारे में ‘‘ठोस उदाहरण’’ पेश करे कि हिंदुओं को उन राज्यों में अल्पसंख्यक का दर्जा नहीं मिल रहा है जहां वे अल्पसंख्यक हैं।
राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (एनसीएम) अधिनियम के एक प्रावधान को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति यू यू ललित, न्यायमूर्ति एस आर भट और न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की पीठ ने कहा कि वह इस मुद्दे से तभी निपटेगी जब अदालत के समक्ष कोई ठोस मामला पेश किया जाए।
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दातार ने कहा कि आम धारणा यह है कि हिंदू अल्पसंख्यक नहीं हो सकते।
न्यायालय ने कहा, ‘जब तक हमें ठोस उदाहरण नहीं मिलते, तब तक हमें इससे नहीं निपटना चाहिए…।’
पीठ ने पूछा कि क्या कोई ठोस मामला है कि हिंदुओं को अल्पसंख्यक घोषित न किए जाने की वजह से उन्हें उन राज्यों में लाभों से वंचित कर दिया जाता है जहां वे अल्पसंख्यक हैं, जैसे मिजोरम या नगालैंड, या कश्मीर में।
शीर्ष अदालत मथुरा निवासी देवकीनंदन ठाकुर द्वारा एनसीएम अधिनियम के एक प्रावधान को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें केंद्र को ‘अल्पसंख्यक’ को परिभाषित करने तथा जिला स्तर पर अल्पसंख्यकों की पहचान के लिए दिशानिर्देश निर्धारित करने का निर्देश देने का आग्रह किया गया था।
सुनवाई के दौरान, दातार ने शीर्ष अदालत में लंबित एक याचिका के बारे में पीठ को बताया जिसमें राज्य स्तर पर अल्पसंख्यकों की पहचान के लिए दिशा-निर्देश तैयार करने का निर्देश देने का आग्रह किया गया है और कहा गया है कि 10 राज्यों में हिंदू अल्पसंख्यक हैं।
पीठ ने मामले को दो सप्ताह के लिए स्थगित कर दिया।
भाषा नेत्रपाल नरेश
नरेश

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