आठ नये शहर विकसित करने की योजना को लागू नहीं किया जा सकता: सरकार ने लोकसभा को बताया
आठ नये शहर विकसित करने की योजना को लागू नहीं किया जा सकता: सरकार ने लोकसभा को बताया
नयी दिल्ली, 13 मार्च (भाषा) केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने कहा है कि आठ नये शहर विकसित करने की योजना को लागू नहीं किया जा सकता क्योंकि 15वें वित्त आयोग का कार्यकाल इस वर्ष 31 मार्च को समाप्त हो रहा है।
आयोग द्वारा प्रदान किया गया 8,000 करोड़ रुपये का अनुदान पिछले पांच वर्षों में उपयोग में नहीं लाया जा सका है।
इस योजना के तहत, प्रत्येक प्रस्तावित शहर को विकसित करने के लिए 1,000 करोड़ रुपये दिए जाने का प्रस्ताव था। प्रस्तावित योजना के अंतर्गत किसी राज्य में केवल एक ही शहर को इसके दायरे में रखा जा सकता है।
केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू ने लोकसभा को बृहस्पतिवार को एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा कि प्रस्तावों की विस्तृत जांच और मूल्यांकन की प्रक्रिया के दौरान, ऐसा प्रतीत हुआ कि कई प्रस्तावों में नये शहर बसाने की योजना बनाने, उन्हें क्रियान्वित करने के लिए आवश्यक संस्थागत और शासकीय ढांचा तैयार नहीं हो सका था, जिससे 15वें वित्त आयोग के अनुदान का उपयुक्त रूप से उपयोग नहीं हो पाया।
मंत्री ने कहा कि वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, ‘नये शहरों के विकास’ के लिए निर्धारित बजटीय प्रावधान को पहले ही अन्य अनुदानों में आवंटित कर दिया गया है और चालू वित्त वर्ष 2025-26 में इस अनुदान के तहत कोई बजटीय प्रावधान नहीं है।
साहू ने कहा, ‘‘इन कारणों को ध्यान में रखते हुए, ‘नये शहरों के विकास’ की योजना को लागू नहीं किया जा सकता, विशेष रूप से ऐसे समय में, जब 15वें वित्त आयोग की अवधि 31 मार्च 2026 को समाप्त हो रही है।’’
केंद्रीय बजट 2026-27 में सरकार ने बेंगलुरु, सूरत और वाराणसी सहित सात शहरी आर्थिक क्षेत्र (सीईआर) बनाने का प्रस्ताव किया है, जिसके लिए प्रत्येक क्षेत्र को पांच वर्षों में 5,000 करोड़ रुपये आवंटित किये जाएंगे।
भाषा सुभाष वैभव
वैभव

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