जिला स्तर पर अल्पसंख्यकों की पहचान करने का अनुरोध कानून के विपरीत :न्यायालय

जिला स्तर पर अल्पसंख्यकों की पहचान करने का अनुरोध कानून के विपरीत :न्यायालय

जिला स्तर पर अल्पसंख्यकों की पहचान करने का अनुरोध कानून के विपरीत :न्यायालय
Modified Date: November 29, 2022 / 08:18 pm IST
Published Date: August 8, 2022 7:58 pm IST

नयी दिल्ली, आठ अगस्त (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि जिला स्तर पर अल्पसंख्यकों की पहचान करने का निर्देश देने के लिए दायर अर्जी कानून के ‘‘विपरीत’’ है क्योंकि धार्मिक और भाषायी अल्पसंख्यकों पर विचार राज्य स्तर पर होना चाहिए।

न्यायमूर्ति यू.यू.ललित और न्यायमूर्ति एस.आर.भट्ट की पीठ ने यह टिप्पणी राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (एनसीएम) अधिनियम-1992 को चुनौती देने के लिए दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए की। इस याचिका में शीर्ष अदालत से यह भी अनुरोध किया गया है कि वह केंद्र को निर्देश दे कि जिला स्तर पर ‘अल्पसंख्यकों’’ को परिभाषित करे और उनकी पहचान के लिए दिशानिर्देश जारी करे।

उच्चतम न्यायालय ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता से कहा कि इस याचिका पर सुनवाई नहीं की जाएगी।

पीठ ने मौखिक टिप्पणी की ‘‘ यह कानून के विपरीत है।’’ इसके साथ ही वर्ष 2002 में आए टीएमए पाई फैसले का संदर्भ दिया।

यह याचिका मथुरा निवासी देवकीनंदन ठाकुर ने दायर की थी। याचिका में कहा गया कि टीएमए पाई मामले में आए फैसले से कानूनी स्थिति एकदम स्पष्ट है कि भाषायी और धार्मिक अल्पसंख्यक तय करने के लिए इकाई राज्य होगा।

अधिवक्ता आशुतोष दुबे के जरिये दायर याचिका में 23 अक्टूबर 1993 को सरकार द्वारा अल्पसंख्यक समुदाय को लेकर जारी अधिसूचना को मनमाना, अतार्किक और संविधान के अनुच्छेद 14,15,21,29 और 30 का विरोधाभासी करार देने का अनुरोध किया गया था।

गौरतलब है कि 18 जुलाई को हुई पिछली सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ता के इस तर्क पर सवाल किया था कि हिंदुओं को उन राज्यों में ‘‘ अल्पसंख्यक’’ का दर्जा नहीं मिल रहा है , जहां वे अल्पसंख्यक हैं। अदालत ने पूछा था कि क्या इस दावे के पक्ष में ‘‘ठोस उदाहरण है।’’

शीर्ष अदालत ने तब कहा था कि अगर इस संबंध में कोई ठोस तथ्य उसके सामने पेश किया जाता है तो तब वह सुनवाई करेगी।

सोमवार की सुनवाई के दौरान पीठ ने टिप्पणी की कि याचिकाकर्ता जिला स्तर पर अल्पसंख्यकों की पहचान का अनुरोध कर रहा है लेकिन इसपर सुनवाई नहीं जा सकती।

पीठ को सूचित किया गया कि अलग अर्जी राज्य स्तर पर अल्पसंख्यकों की पहचान करने के लिए दिशानिर्देश बनाने हेतु दायर की गई है। याचिका में दावा किया कि 10 राज्यों में हिंदू अल्पसंख्यक है और यह मामला शीर्ष अदालत के एक अन्य पीठ के समक्ष लंबित है।

अदालत में लंबित अर्जी दायर करने वाले याचिकाकर्ताओं में शामिल अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने शीर्ष अदालत को बातया कि कुछ राज्यों में हिंदू अल्पसंख्यक हैं।

पीठ ने टिप्पणी की कि वह इस संबंध में आम निर्देश नहीं जारी कर सकती। शीर्ष अदालत ने कहा कि ठाकुर द्वारा दायर अर्जी को अन्य लंबित याचिका के साथ सितंबर के पहले में उचित अदालत के समक्ष सूबीबद्ध किया जाएगा।

भाषा धीरज नरेश

नरेश


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