जब बोलने की जरूरत होती है तो प्रधानमंत्री मोदी मौन हो जाते हैं: सिब्बल
जब बोलने की जरूरत होती है तो प्रधानमंत्री मोदी मौन हो जाते हैं: सिब्बल
नयी दिल्ली, पांच मार्च (भाषा) राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल ने बृहस्पतिवार को ईरान युद्ध को लेकर सरकार के रुख की आलोचना करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जब बोलने की जरूरत होती है तो मौन रहते हैं।
सिब्बल ने पंडित जवाहरलाल नेहरू और कुछ अन्य पूर्व प्रधानमंत्रियों का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे अतीत में भारतीय प्रधानमंत्रियों ने देश के मूल्यों को बनाए रखने की कोशिश की थी।
सिब्बल ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘इतिहास हमें बहुत कुछ सिखाता है। 1953 में पंडित जवाहरलाल नेहरू ने ईरान में रूसी सेना के कब्जे का विरोध किया था और कहा था कि ईरानी लोगों के अधिकारों का सम्मान किया जाना चाहिए और सेना को बाहर जाना चाहिए। यह एक ऐसे प्रधानमंत्री का साहस है जो रूस के करीब थे और फिर भी उन्होंने यह बयान दिया।’’
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘1994 में पी वी नरसिंह राव ने तत्कालीन विदेश मंत्री दिनेश सिंह को अली खामेनेई को कश्मीर पर उस प्रस्ताव का समर्थन नहीं करने के लिए मनाने की खातिर ईरान भेजा था, जिसे पाकिस्तान इस्लामिक सहयोग संगठन में आगे बढ़ाना चाहता था। पाकिस्तान सफल नहीं हो सका। एक मजबूत प्रधानमंत्री यही करता है।’’
उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री मोदी ऐसे प्रधानमंत्री हैं कि जहां उन्हें बोलना चाहिए वहां वह मौन हो जाते हैं।
भाषा हक हक नरेश
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