प्रतिभा पाटिल, मीरा कुमार और मायावती ने महिला आरक्षण संबंधी विधेयक का समर्थन किया

प्रतिभा पाटिल, मीरा कुमार और मायावती ने महिला आरक्षण संबंधी विधेयक का समर्थन किया

प्रतिभा पाटिल, मीरा कुमार और मायावती ने महिला आरक्षण संबंधी विधेयक का समर्थन किया
Modified Date: April 15, 2026 / 04:43 pm IST
Published Date: April 15, 2026 4:43 pm IST

नयी दिल्ली, 15 अप्रैल (भाषा) पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल, पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की प्रमुख मायावती ने महिला आरक्षण अधिनियम में संशोधन की पहल का स्वागत करते हुए कहा है कि यह कदम विधायी निकायों में महिलाओं का अधिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करके भारत के लोकतांत्रिक ढांचे को मजबूत करेगा।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लिखे पत्र में पाटिल ने कहा कि ऐतिहासिक संवैधानिक संशोधन कानून औपचारिक रूप से महिलाओं की अपार क्षमता को पहचान देगा और शासन के उच्चतम स्तर पर उनके नेतृत्व के लिए संस्थागत रास्ते तैयार करेगा।

मीरा कुमार और मायावती ने भी कहा कि भले ही यह एक लंबा इंतजार रहा हो, लेकिन देश के विधायी निकायों में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का कार्यान्वयन लंबे संघर्ष के बाद एक सुखद अंत होगा।

संसद के वर्तमान बजट सत्र के तहत 16 से 18 अप्रैल तक तीन दिवसीय बैठक बुलाई गई है, जिसके दौरान ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ में संशोधन विधेयक को पेश किया जाएगा जिसमें लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण 2029 से कार्यान्वित करने का प्रावधान है।

पाटिल ने कहा, ‘‘मैं नारी शक्ति वंदन अधिनियम के ऐतिहासिक कार्यान्वयन की पहल के लिए अपनी हार्दिक सराहना करता हूं। भारत की पहली महिला राष्ट्रपति के रूप में मैंने लंबे समय से इस विश्वास का समर्थन किया है कि वास्तविक महिला सशक्तीकरण केवल राष्ट्र को प्रभावित करने वाले निर्णयों को आकार देने के लिए उन्हें समान अवसर प्रदान करके ही प्राप्त किया जा सकता है।’’

पाटिल ने अपने पत्र में कहा, ‘‘यह संशोधन एक कानूनी प्रावधान से कहीं अधिक है, यह लैंगिक समानता को आगे बढ़ाने, समावेशी शासन को बढ़ावा देने और एक मजबूत, अधिक प्रगतिशील भारत के निर्माण के हमारे सामूहिक संकल्प की एक शक्तिशाली अभिपुष्टि है।’’

पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं की बढ़ी हुई उपस्थिति निस्संदेह विविध दृष्टिकोणों के साथ विधायी चर्चा को समृद्ध करेगी और अधिक संतुलित तथा सहानुभूतिपूर्ण नीतिगत परिणामों को जन्म देगी।

उन्होंने कहा कि भारत ने राष्ट्रीय विकास के हर क्षेत्र में महिलाओं के असाधारण योगदान को लगातार देखा है।

उनका कहना है, “यह कानून औपचारिक रूप से उनकी अपार क्षमता को पहचानता है और शासन के उच्चतम स्तर पर उनके नेतृत्व के लिए संस्थागत रास्ते बनाता है।’’

पूर्व राष्ट्रपति ने कहा, ‘मैं उन नेताओं और सभी हितधारकों की सराहना करता हूं, जिन्होंने इस लंबे समय से पोषित सपने को वास्तविकता में बदलने के लिए वर्षों तक अथक प्रयास किया… महिला सशक्तिकरण और राष्ट्रीय प्रगति की दिशा में निरंतर प्रयासों के लिए शुभकामनाएं।’

पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने इस बात का उल्लेख किया कि महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण के लिए संघर्ष पिछले 30 वर्षों से चल रहा है, जब पहली बार, गीता मुखर्जी की अध्यक्षता वाली एक संयुक्त संसदीय समिति ने 1996 में एक मसौदा विधेयक की जांच की और कुछ सिफारिशें कीं।

उन्होंने कहा, ‘‘यह लड़ाई 30 साल से चल रही है, जब से गीता मुखर्जी समिति बनी थी। मैं उस समिति की सदस्य थी। एक बार जब संशोधनों को अंतिम मंजूरी मिल जाएगी, तभी हमें लगेगा कि हमारा संघर्ष सफल हो गया है।’’

कुमार महिला आरक्षण विधेयक के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए सोमवार को दिल्ली में एक राष्ट्रीय स्तर की बैठक ‘नारी शक्ति वंदन सम्मेलन’ में उपस्थित थीं, जिसे प्रधानमंत्री मोदी ने संबोधित किया था।

बसपा की अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने लोकसभा तथा राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण में से अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों तथा अन्य पिछड़े वर्ग (ओबीसी) की औरतों को अलग से आरक्षण देने की जरूरत बताते हुए बुधवार को कहा कि ऐसा नहीं होना महिला आरक्षण के वास्तविक उद्देश्य को काफी हद तक ‘नकारने’ जैसा है।

मायावती ने लखनऊ में संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि केंद्र सरकार ने महिला आरक्षण के विषय पर कल से तीन दिन का विशेष सत्र बुलाया है।

उन्होंने कहा कि हालांकि उनकी पार्टी लोकसभा तथा राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाये जाने का स्वागत करती है लेकिन इसमें अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों तथा अन्य पिछड़े वर्ग की महिलाओं को अलग से आरक्षण नहीं दिये जाने से इन वर्गों की महिलाओं को आरक्षण का पूरा लाभ मिल पाएगा, इसमें काफी संदेह है।

उन्होंने कहा, ”ऐसा ना होना महिला आरक्षण के वास्तविक उद्देश्य को काफी हद तक नकारने जैसा है।”

मायावती ने कहा कि देश में महिला सशक्तिकरण की बातें तो बहुत की जाती हैं लेकिन सही नियत, नीति और मजबूत इच्छा शक्ति के अभाव के कारण इस पर ईमानदारी से अमल शायद ही कभी हो पाया है ‘‘इसी का नतीजा है कि कमजोर वर्गों के लोगों की तरह ही महिलाओं के विरुद्ध भी जुल्म, ज्यादतियां तथा शोषण की जघन्य घटनाएं आज भी रुकने का नाम नहीं ले रही हैं।’’

भाषा हक हक रंजन

रंजन


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