निजी सदस्य विधेयक का बिना उचित विचार के विरोध नहीं किया जाता : उमर अब्दुल्ला

निजी सदस्य विधेयक का बिना उचित विचार के विरोध नहीं किया जाता : उमर अब्दुल्ला

निजी सदस्य विधेयक का बिना उचित विचार के विरोध नहीं किया जाता : उमर अब्दुल्ला
Modified Date: March 30, 2026 / 06:02 pm IST
Published Date: March 30, 2026 6:02 pm IST

(तस्वीरों के साथ)

जम्मू, 30 मार्च (भाषा) जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सोमवार को कहा कि सरकार बिना उचित विचार के किसी निजी सदस्य विधेयक का विरोध नहीं करती। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी प्रस्ताव पर कोई भी रुख कायम करने से पहले उसका विस्तृत विश्लेषण किया जाता है।

उमर ने कांग्रेस विधायक निजामुद्दीन भट की ओर से विधानसभा में पेश उस निजी सदस्य विधेयक का विरोध किया, जिसमें सिविल सेवाओं में रोजगार के समान अवसर सुनिश्चित करने की मांग की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि चर्चा के दौरान की गई टिप्पणियों से यह धारणा बन सकती है कि विधेयकों को पढ़ा नहीं जाता और बिना सोचे-समझे नियमित रूप से उनका विरोध किया जाता है। उन्होंने ऐसी धारणा को “अनुचित” बताया।

उमर ने कहा, “ऐसा लग सकता है कि हमें ‘विरोध करो’ लिखा संदेश मिलता है और हम किसी विधेयक पर आपत्ति जताने के लिए खड़े हो जाते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है।”

उन्होंने कहा कि जब भी कोई प्रस्ताव सरकार के पास पहुंचता है-चाहे विधानसभा के माध्यम से हो या किसी अन्य माध्यम से-उस पर विस्तार से विचार किया जाता है।

उमर ने कहा, “हम इसकी (प्रस्ताव) व्यवहार्यता पर विचार करते हैं और लाभ-हानि का आकलन करते हैं। अगर लाभ हानियों से अधिक हैं, तो हम इसका विरोध नहीं करते।”

विधानसभा में सूचीबद्ध 33 निजी सदस्य विधेयक में से लगभग एक दर्जन सदन में पेश किए गए, जिनमें से ज्यादातर को सरकार की प्रतिक्रिया के बाद संबंधित सदस्यों ने वापस ले लिया, जबकि कुछ को ध्वनि मत से ठुकरा दिया गया।

उमर ने भट की ओर इशारा करते हुए कहा कि उनके निजी सदस्य विधेयक पर विचार करने पर उसमें फायदे के मुकाबले खामियां और संभावित समस्याएं ज्यादा दिखाई दीं।

मुख्यमंत्री ने कांग्रेस विधायक की चिंताओं को स्वीकार करते हुए कहा कि भर्ती या तैनाती को स्थानीय स्तर तक सीमित रखने से प्रशासनिक कठिनाइयां पैदा होंगी, जिनमें अतिरिक्त कैडर, ब्लॉक स्तर पर उपयुक्त उम्मीदवारों की कमी और छूट की आवश्यकता शामिल है, जिससे मनमानी हो सकती है।

‍उन्होंने कहा कि इससे आरक्षण की आवश्यकताओं को पूरा करना भी मुश्किल हो जाएगा और छोटे समूहों में पदोन्नति के अवसर सीमित हो जाएंगे, जिससे एक ही समय में भर्ती किए गए कर्मचारियों के बीच असमानताएं पैदा होंगी।

उमर ने कहा कि भट की ओर से उठाए गए मुद्दे पर ध्यान देने की जरूरत है, लेकिन विधेयक एक उपयुक्त समाधान नहीं है। उन्होंने विधेयक को वापस लेने का अनुरोध करते हुए कहा कि सरकार इस चिंता के समाधान के लिए वैकल्पिक उपायों पर विचार करेगी।

भाषा पारुल नरेश

नरेश


लेखक के बारे में