प्रियंका ने हिमंत पर निशाना साधा, कहा : एक परिवार असम को लूट रहा
प्रियंका ने हिमंत पर निशाना साधा, कहा : एक परिवार असम को लूट रहा
(तस्वीरों के साथ)
नजीरा/तिंगखोंग/खोवांग (असम), एक अप्रैल (भाषा) कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाद्रा ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा पर बुधवार को निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि इस संसाधन संपन्न राज्य में “केवल एक परिवार सब कुछ लूट रहा है”, जबकि आम लोगों के पास “कुछ भी नहीं है।”
प्रियंका ने यह भी आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली सरकार लोगों को डरा-धमकाकर काम कर रही है।
उन्होंने दावा किया, “असम में एक परिवार सब कुछ लूट रहा है और जब वे लूटपाट नहीं कर रहे होते हैं, तो खदान, जमीन और हर संपत्ति बड़े उद्योगपतियों को सौंप दी जाती है।”
कांग्रेस नेता ने असम में भाजपा नीत सरकार के राज में हर मोर्चे पर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार होने का आरोप लगाते हुए शारदा, स्मार्ट सिटी और एनसी हिल्स जैसे कई घोटालों का जिक्र किया।
नजीरा में कांग्रेस उम्मीदवार देबब्रत सैकिया के समर्थन में आयोजित चुनावी रैली को संबोधित करते हुए प्रियंका ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर तीखा हमला किया और उन पर अमेरिका का “गुलाम” होने का आरोप लगाया।
प्रियंका ने कहा, “भाजपा ने कहा था कि उसने ‘डबल इंजन’ वाली सरकार दी है। असल में यह ‘दोहरी गुलामी’ वाली सरकार है। प्रधानमंत्री मोदी अमेरिका के (डोनाल्ड) ट्रंप और इजराइल के (बेंजामिन) नेतन्याहू की गुलामी में लगे हैं और हिमंत विश्व शर्मा मोदी की गुलामी कर रहे हैं।”
उन्होंने दावा किया कि राज्य की भाजपा सरकार चाय बागान के श्रमिकों की दैनिक मजदूरी बढ़ाने और उन्हें बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराने का वादा पूरा करने में नाकाम रही।
प्रियंका ने कहा, “विभिन्न जनजातीय समुदाय के लोग अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा दिए जाने की वर्षों से मांग कर रहे हैं। भाजपा ने उन्हें अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने का वादा किया था, लेकिन वे ऐसा करने में विफल रहे।”
प्रियंका ने आरोप लगाया कि असम की महिलाओं को विभिन्न सरकारी योजनाओं, विशेष रूप से प्रमुख गरीबी उन्मूलन योजना ‘अरुणोदय’ से उनके नाम हटाने की धमकी देकर प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की रैलियों में जबरन शामिल होने के लिए मजबूर किया जाता है।
कांग्रेस नेता ने कहा, “इन योजनाओं के तहत दिया जाने वाला पैसा हिमंत विश्व शर्मा का पैसा नहीं है। यह जनता का पैसा है और हर नागरिक का पैसा है। सरकारी योजनाएं इस तरह से चलाई जातीं।”
उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री हिमंत डर पैदा करके और धमकियों के बल पर देश और राज्य पर शासन कर रहे हैं। हमारी लड़ाई इसी डर के खिलाफ तथा असम की संस्कृति और सभ्यता की रक्षा के लिए है।”
तिंगखोंग में कांग्रेस उम्मीदवार बिपुल गोगोई के समर्थन में आयोजित चुनावी रैली को संबोधित करते हुए प्रियंका ने कहा कि असम के पास भूमि, खदानें, इतिहास, प्रकृति, वन और हर तरह के अन्य संसाधन हैं।
उन्होंने कहा, “इस भूमि ने आपको सब कुछ दिया है। लेकिन फिर भी आप लोगों के पास कुछ नहीं है। असम में केवल एक ही परिवार फल-फूल रहा है। आपकी आंखों के सामने सब कुछ लूटा जा रहा है। भाजपा सरकार ने लोगों के साथ विश्वासघात किया है।”
प्रियंका ने आरोप लगाया कि राज्य “माफियाओं और गिरोहों” के चंगुल में है और सरकार लोगों को धमकाकर काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि लोकप्रिय गायक जुबिन गर्ग असम की आवाज थे और उन्होंने भाईचारे, एकता और प्रेम के लिए गीत गाए थे।
जुबिन की पिछले साल सितंबर में सिंगापुर में समुद्र में तैरते समय मौत हो गई थी।
प्रियंका ने कहा, “लेकिन असम सरकार ने जुबिन के परिवार को न्याय नहीं दिलाया। हम ऐसी सरकार लाना चाहते हैं, जो 100 दिनों के भीतर जुबिन गर्ग को न्याय दिलाए।”
खोवांग में सहयोगी दल असम जातीय परिषद के उम्मीदवार लुरिनज्योति गोगोई के समर्थन में आयोजित रैली में प्रियंका ने आरोप लगाया कि असम और केंद्र की सरकारें “कायरों” के हाथों चलाई जा रही हैं।
कांग्रेस नेता ने कहा कि राज्य में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार के पिछले पांच वर्षों के शासन के दौरान लोगों के जीवन में कोई सुधार नहीं हुआ है।
उन्होंने दावा किया, “असम में पिछले पांच वर्षों में लोगों की समस्याएं और खतरे बढ़ गए हैं। महंगाई चरम पर है और हर जरूरी चीज आम आदमी की पहुंच से बाहर हो गई है। युवाओं के लिए रोजगार के अवसर नहीं हैं, जिसके चलते वे काम की तलाश में राज्य से बाहर जा रहे हैं।”
प्रियंका ने दावा किया कि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण चुनावों के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ जाएंगी। उन्होंने कहा कि यह विधानसभा चुनाव असम के लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए स्वतंत्रता संग्राम जैसा है।
बाद में जुबिन की मौत पर संवाददाताओं से बात करते हुए प्रियंका ने कहा, “मेरा सच में मानना है कि ऐसी बातों का राजनीतिकरण नहीं होना चाहिए। लेकिन जब जनता के बीच यह मांग उठती है कि जिस व्यक्ति का वे आदर और सम्मान करते थे, उसे न्याय नहीं मिल रहा है, तो ऐसे में एक नेता के तौर पर क्या यह हमारा फर्ज नहीं बन जाता कि हम यह कहें कि हम न्याय दिलाने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे?”
उन्होंने सवाल किया, “इसमें राजनीति कहां है? यह हमारा कर्तव्य है। हम करोड़ों असमिया लोगों की आवाज को नजरअंदाज नहीं कर सकते।”
भाषा पारुल देवेंद्र
देवेंद्र

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