ईडी अधिकारी के खिलाफ जांच केंद्रीय एजेंसी को हस्तांतरित की जा सकती है: शीर्ष अदालत
ईडी अधिकारी के खिलाफ जांच केंद्रीय एजेंसी को हस्तांतरित की जा सकती है: शीर्ष अदालत
(फाइल फोटो के साथ)
नयी दिल्ली, छह अगस्त (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को संकेत दिया कि वह प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारी अंकित तिवारी के खिलाफ तमिलनाडु के सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय के रिश्वत मामले की जांच एक केंद्रीय जांच एजेंसी को सौंप सकता है।
शीर्ष अदालत ने हालांकि स्पष्ट कर दिया कि वह इस मामले में राज्य की कार्यवाही पर लगे स्थगन को हटाने के पक्ष में नहीं है।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की खंडपीठ प्रवर्तन निदेशालय की एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
ईडी ने 2024 में याचिका दायर कर उच्चतम न्यायालय से अनुरोध किया था कि इस मामले की जांच तमिलनाडु के सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय के हाथों से लेकर सीबीआई को सौंपी जाए।
जनवरी 2024 में शीर्ष अदालत ने तमिलनाडु की एजेंसी द्वारा दर्ज की गयी प्राथमिकी में आगे की कार्यवाही पर स्थगन लगा दिया था।
संक्षिप्त सुनवाई के दौरान, तमिलनाडु की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील गुरु कृष्ण कुमार ने खंडपीठ से कहा कि राज्य ने अंतरिम रोक हटाने के लिए एक अर्ज़ी दायर की है।
उन्होंने कहा, ‘‘ ईडी अधिकारी के खिलाफ आगे की कार्रवाई पर स्थगन लगा दिया था। हमने इस स्थगन को हटाने का अनुरोध किया है।’’
तमिलनाडु की एजेंसी ने आरोप लगाया कि ईडी अधिकारी तिवारी को रिश्वत लेते हुए ‘रंगे हाथों’ पकड़ा गया था। उसने अनुरोध किया कि जांच को आगे बढ़ने दिया जाए।
हालांकि, खंडपीठ ने सुझाव दिया कि राज्य की एजेंसी को जांच जारी रखने की अनुमति देने के बजाय, जांच का काम किसी दूसरी केंद्रीय जांच एजेंसी को सौंपा जा सकता है।
प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘या फिर, हम जांच किसी केंद्रीय एजेंसी को सौंप दें।’’
खंडपीठ ने कहा कि वह पहले दी गई अंतरिम सुरक्षा को हटाने के पक्ष में नहीं है।
प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘हम स्थगन नहीं हटाएंगे। हम मुख्य मामले पर ही फैसला करेंगे।’’
भाषा राजकुमार नरेश
नरेश

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