आपूर्ति में व्यवधानों से निपटने के लिए ‘क्वाड’ ने हिंद-प्रशांत ऊर्जा सुरक्षा ढांचा शुरू किया

आपूर्ति में व्यवधानों से निपटने के लिए ‘क्वाड’ ने हिंद-प्रशांत ऊर्जा सुरक्षा ढांचा शुरू किया

आपूर्ति में व्यवधानों से निपटने के लिए ‘क्वाड’ ने हिंद-प्रशांत ऊर्जा सुरक्षा ढांचा शुरू किया
Modified Date: May 26, 2026 / 06:59 pm IST
Published Date: May 26, 2026 6:59 pm IST

नयी दिल्ली, 26 मई (भाषा) क्वाड समूह ने मंगलवार को ‘हिंद-प्रशांत ऊर्जा सुरक्षा ढांचे’ की घोषणा की, जिसका उद्देश्य रणनीतिक ईंधन भंडार, लक्षित नीतिगत पहलों और समन्वित आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र के माध्यम से ऊर्जा आपूर्ति में होने वाले व्यवधानों का मुकाबला करना है।

राष्ट्रीय राजधानी में क्वाड समूह के विदेश मंत्रियों की बैठक में इस कदम को अंतिम रूप दिया गया। यह कदम होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी के मद्देनजर ऊर्जा आपूर्ति शृंखलाओं में व्यवधानों को लेकर बढ़ती वैश्विक चिंताओं के बीच आया है। होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया के तेल के लगभग पांचवें हिस्से और द्रवीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) का कारोबार होता है।

क्वाड की बैठक की अध्यक्षता विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने की और इसमें अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो, ऑस्ट्रेलियाई विदेश मंत्री पेनी वोंग और जापानी विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोटेगी ने भाग लिया।

विदेश मंत्रियों ने निर्बाध नौवहन की स्वतंत्रता और वैश्विक वाणिज्य के निर्बाध प्रवाह को सुनिश्चित करने के महत्व को दोहराया, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य भी शामिल है, और वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही में बाधा डालने वाले किसी भी प्रतिबंधात्मक उपाय का विरोध किया।

उन्होंने यह सुनिश्चित करने को लेकर मजबूत प्रतिबद्धता व्यक्त की कि ऊर्जा बाजार सुचारु रूप से कार्य करें तथा स्थिर, पारदर्शी, सुरक्षित और लचीले बने रहें। साथ ही उन्होंने “मजबूत और विविधीकृत” आपूर्ति के महत्व की भी पुष्टि की।

क्वाड ने उत्पादक और उपभोक्ता देश सहित ऊर्जा बाजार के सभी प्रतिभागियों से आग्रह किया कि वे ऊर्जा बाजार में महत्वपूर्ण अस्थिरता और व्यवधानों के समय में हिंद-प्रशांत क्षेत्र और विश्व स्तर पर ऊर्जा उत्पादों की स्थिर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए पारदर्शी और खुले ऊर्जा बाजारों को बनाए रखें।

मंत्रियों ने वैश्विक आर्थिक स्थिरता और ऊर्जा सुरक्षा के लिए आवश्यक सुरक्षित और निर्बाध व्यापार प्रवाह के महत्व पर भी जोर दिया, जिसमें नौवहन और महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों एवं बुनियादी ढांचे की सुरक्षा शामिल है।

जयशंकर ने संवाददाताओं को बताया कि क्वाड देशों का दृढ़ विश्वास है कि आर्थिक लचीलेपन को बढ़ावा दिया जाना चाहिए और आपूर्ति शृंखलाओं को मजबूत किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, “हमारी चर्चा में ऊर्जा और उर्वरक की वर्तमान उपलब्धता के साथ-साथ महत्वपूर्ण खनिजों और संसाधनों की उपलब्धता पर भी बात हुई। हमारा लक्ष्य आपस में सहयोग को मजबूत करना और दूसरों की सहायता करना भी है।”

उन्होंने कहा, “आने वाले दिनों में, भले वह आर्थिक गतिविधि हो, ऊर्जा व्यापार हो या समुद्री वाणिज्य, हिंद-प्रशांत क्षेत्र दुनिया के लिए और भी महत्वपूर्ण हो जाएगा।”

एक आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया है कि भारत, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान एक “सहभागिता योजना” के माध्यम से प्रौद्योगिकी, प्रबंधन, नीति, अंतरराष्ट्रीय बाजार विश्लेषण और आपातकालीन प्रतिक्रिया अभ्यासों में हिंद-प्रशांत ऊर्जा सुरक्षा पर क्वाड पहल के लिए सहयोग के क्षेत्रों की पहचान करने के लिए काम करेंगे।

इसमें कहा गया है, ‘‘इस सामूहिक प्रयास का उद्देश्य प्रत्येक देश के ऊर्जा क्षेत्र के अद्वितीय संसाधनों और क्षमताओं को पहचानना और उनका लाभ उठाना होगा, जिसमें उनकी संबंधित रणनीतिक पेट्रोलियम प्रणालियों को मजबूत करना भी शामिल है। वे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में साझेदारों के साथ मिलकर क्षेत्रीय ऊर्जा लचीलेपन को मजबूत करने में मदद करेंगे।’’

समूह ने कहा कि वह एक स्वतंत्र और मुक्त हिंद-प्रशांत के लिए एक “साझा दृष्टिकोण” से एकजुट है, जो मजबूत आर्थिक और ऊर्जा प्रणालियों पर आधारित है।

भाषा प्रशांत सुरेश

सुरेश


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