जयपुर, 27 अगस्त (भाषा) कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने निर्वाचन आयोग पर सवाल उठाते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि देश को इसकी कार्यशैली पर गंभीरता से विचार करना होगा।
गहलोत ने एक बयान में आयोग पर कटाक्ष करते हुए आरोप लगाया, ‘‘जिस भारतीय चुनाव आयोग की निष्पक्षता की मिसाल कभी पूरी दुनिया देती थी, आज उसकी यह दुर्गति हो गई कि वह सत्ताधारी दल के पक्ष में काम करता नजर आ रहा है।’’
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि यही वह आयोग है जिसने नामीबिया, दक्षिण अफ्रीका, नाइजीरिया समेत कई देशों के चुनाव अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया, जो ‘इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फोर डेमोक्रेसी एंड इलेक्शन असिस्टेंस’ का संस्थापक सदस्य रहा और जिसकी साख पर दुनिया भरोसा करती थी।
उन्होंने दावा किया कि आज उसी आयोग की कार्यशैली पर देश में ही सवाल खड़े हो गए हैं।
गहलोत ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में इसकी गंभीर बानगी सामने आई है। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अपीलीय न्यायाधिकरण ने अब तक जिन 82,782 अपीलों पर सुनवाई पूरी की, उनमें से 91 प्रतिशत मामलों में मतदाताओं के नाम गलत तरीके से काटे जाने की बात सामने आई है।
कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘सवाल यह है कि बंगाल में करीब 27 लाख वोट काटे जाने की शिकायतें हैं, अभी तक इसका महज एक छोटा हिस्सा ही निपटा है, तो बाकी लाखों अपीलों का क्या होगा?’’
गहलोत के अनुसार, कांग्रेस नेता राहुल गांधी लगातार ‘वोट चोरी’ का मुद्दा जिस मजबूती से उठाते रहे हैं, यह आंकड़े उस पर मुहर लगा रहे हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘सबसे दुखद यह है कि न्यायपालिका भी इस पर आंखें मूंदे बैठी है। चुनाव के दौरान एसआईआर पर उच्चतम न्यायालय की यह टिप्पणी बेहद दुर्भाग्यपूर्ण थी कि जो लोग एसआईआर की वजह से इस बार वोट नहीं दे पा रहे, वे अगली बार वोट दे लेंगे।’’
गहलोत ने कहा कि अब देश को चुनाव आयोग की कार्यशैली पर गंभीरता से विचार करना होगा, वरना लोकतंत्र की बुनियाद ही खोखली हो जाएगी।
भाषा पृथ्वी शफीक
शफीक