विजयन के परिसरों पर छापेमारी : चेन्निथला ने ‘कांग्रेस-भाजपा साठगांठ’ के आरोप को खारिज किया

विजयन के परिसरों पर छापेमारी : चेन्निथला ने 'कांग्रेस-भाजपा साठगांठ' के आरोप को खारिज किया

विजयन के परिसरों पर छापेमारी : चेन्निथला ने ‘कांग्रेस-भाजपा साठगांठ’ के आरोप को खारिज किया
Modified Date: May 27, 2026 / 10:27 pm IST
Published Date: May 27, 2026 10:27 pm IST

(तस्वीरों के साथ)

तिरुवनंतपुरम, 27 मई (भाषा) केरल के गृहमंत्री रमेश चेन्निथला ने बुधवार को उन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया जिनमें पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन से जुड़े परिसरों पर प्रवर्तन निदेशालय के छापों को ‘‘कांग्रेस-भाजपा का अभियान’’ बताया गया। उन्होंने दावा किया कि मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की ही भारतीय जनता पार्टी के साथ साझेदारी थी।

केरल के मंत्री के. मुरलीधरन ने कहा कि पार्टी को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) पर भरोसा नहीं है और वह इसकी जांच को गंभीरता से नहीं लेती।

उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘इसलिए, छापेमारी को जारी रहने दीजिए।’’

चेन्निथला ने संवाददाताओं से कहा कि माकपा को यह बताना होगा कि भाजपा के साथ उसकी ‘‘साझेदारी’’ क्यों टूटी, जिसके चलते प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई हुई।

मंत्री ने माकपा के उस दावे को भी नकार दिया कि यह छापेमारी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन की एक दिन पहले हुई मुलाकात का नतीजा है।

मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री और केरल के मुख्यमंत्री के बीच मुलाकात राज्य के हित में जरूरी थी और यह सामान्य सरकारी कामकाज का हिस्सा है।

उन्होंने याद दिलाया, ‘‘जब पिनराई विजयन मुख्यमंत्री थे, तब वह खुद कितनी बार प्रधानमंत्री से मिले थे।’’

उन्होंने कहा कि इस मुलाकात को छापों से जोड़ने की कोई जरूरत नहीं है।

चेन्निथला ने माकपा के इस आरोप को भी ‘‘घिसा-पिटा राग’’ बताया कि छापे कांग्रेस व भाजपा की मिलीभगत का नतीजा हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘(हमें) इसकी कोई जरूरत नहीं है। कांग्रेस, भाजपा और माकपा का रुख सब जानते हैं। मैं बस यह पूछना चाहता हूं कि साझेदारी करने वालों का क्या हुआ? माकपा और भाजपा की साझेदारी थी, उनके बीच सबसे गहरा रिश्ता था। उन्हें लोगों को बताना चाहिए कि वह साझेदारी कैसे और क्यों टूटी।’’

बाद में, मुरलीधरन ने कहा कि कांग्रेस प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की हर कार्रवाई से सहमत नहीं है।

माकपा कार्यकर्ताओं और नेताओं द्वारा इन छापों के विरोध में सड़कों पर उतरने को लेकर उन्होंने कहा कि यह केरल के पूर्व मुख्यमंत्री के प्रति प्रेम के कारण नहीं है।

मुरलीधरन ने सवाल किया, ‘‘अब जबकि पुलिस सहित सभी विभाग हमारे अधीन हैं, तो उनके लिए विरोध प्रदर्शनों के नाम पर सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का यह एक अच्छा अवसर है। वरना कोई नीट परीक्षा के मुद्दे पर पुलिस के वाहन पर पथराव क्यों करेगा, जिस पर सरकार और विपक्ष दोनों का एक ही रुख है?’’

मुरलीधरन ने दावा किया कि माकपा कार्यकर्ता और सदस्य पार्टी समितियों की बैठकों में खुद विजयन की आलोचना करते रहे हैं, इसलिए ये विरोध प्रदर्शन उनके लिए नहीं बल्कि केरल सरकार की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के लिए हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘यह सही रुख नहीं है।’’

चेन्निथला ने कहा कि केरल के गृह विभाग और पुलिस को ईडी की छापेमारी के बारे में कोई जानकारी नहीं थी।

उन्होंने कहा, ‘‘हमें सूचित नहीं किया गया था, और न ही पुलिस की सहायता मांगी गई थी। ईडी ने तलाशी अभियान चलाने के लिए केंद्रीय बलों का इस्तेमाल किया।’’

ईडी ने राज्य में कुल 10 परिसरों पर छापेमारी की है। इनमें राजधानी तिरुवनंतपुरम में 81 वर्षीय पूर्व मुख्यमंत्री का किराए का मकान, कन्नूर का एक स्थान तथा निजी कंपनी सीएमआरएल से जुड़े प्रमुख लोगों के आवास शामिल हैं। यह कार्रवाई विजयन की बेटी टी वीणा के खिलाफ सीएमआरएल धनशोधन मामले की जांच के तहत की गई।

यह कार्रवाई केरल उच्च न्यायालय द्वारा सीएमआरएल की उस याचिका को खारिज किए जाने के एक दिन बाद की गई, जिसमें कंपनी ने मामले में ईडी की कार्यवाही रद्द करने का अनुरोध किया था। अदालत के फैसले के बाद केंद्रीय एजेंसी को जांच जारी रखने की अनुमति मिल गई।

ईडी के अनुसार, धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत 2024 में दर्ज मामले में आरोप है कि सीएमआरएल ने 2017 से 2020 के बीच वीणा की कंपनी ‘एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस’ को 1.72 करोड़ रुपये का अवैध भुगतान किया, जबकि इस आईटी कंपनी ने सीएमआरएल को कोई सेवा प्रदान नहीं की थी।

छापेमारी के बाद, माकपा के महासचिव एम. ए. बेबी, प्रदेश सचिव एम. वी. गोविंदन और पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं ने इन्हें ‘राजनीति से प्रेरित’ और पार्टी तथा विजयन पर एक ‘जघन्य हमला’ करार दिया।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा विजयन के कन्नूर स्थित आवास पर भी तलाशी ली गई, जिसके विरोध में माकपा द्वारा राज्य भर में प्रदर्शन किए गए।

भाषा सुमित शफीक

शफीक


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