रेलवे अमृत भारत स्टेशन के पुनर्विकास से संबंधित दस्तावेज आरटीआई के तहत उपलब्ध कराए: सीआईसी

रेलवे अमृत भारत स्टेशन के पुनर्विकास से संबंधित दस्तावेज आरटीआई के तहत उपलब्ध कराए: सीआईसी

रेलवे अमृत भारत स्टेशन के पुनर्विकास से संबंधित दस्तावेज आरटीआई के तहत उपलब्ध कराए: सीआईसी
Modified Date: June 4, 2026 / 08:47 pm IST
Published Date: June 4, 2026 8:47 pm IST

नयी दिल्ली, चार जून (भाषा) केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने पश्चिम मध्य रेलवे को अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत एक रेलवे स्टेशन पर किए गए पुनर्विकास और निर्माण कार्यों से संबंधित दस्तावेज सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत मुहैया कराने का निर्देश दिया है।

सीआईसी ने साथ ही टिप्पणी की कि व्यक्तिगत जानकारी और व्यावसायिक गोपनीयता से संबंधित प्रावधानों के तहत जानकारी देने से इनकार नहीं किया जा सकता है।

आयोग ने यह निर्देश मध्यप्रदेश के नर्मदापुरम रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास से संबंधित दस्तावेजों की प्रतियां मुहैया कराने को लेकर की गई एक शिकायत के बाद जारी किया।

आवेदक ने सूचना के अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत कार्य आदेश, अनुमान, रेखाचित्र और संबंधित अभिलेख मुहैया कराने का अनुरोध किया था। रेलवे अधिकारियों ने हालांकि अधिनियम की धारा 8(1)(जे) और 8(1)(डी) के तहत छूट का हवाला देते हुए जानकारी से इनकार किया था।

सुनवाई के दौरान, संबंधित रेलवे अधिकारियों ने बताया कि संबंधित जानकारी को सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत मुहैया कराने से छूट प्राप्त है।

हालांकि, उन्होंने स्वेच्छा से शिकायतकर्ता को सूचना का अधिकार आवेदन के जवाब में संशोधित उत्तर प्रदान करने पर सहमति व्यक्त की।

सूचना आयुक्त स्वागत दास ने सूचना देने से इनकार करने के लिए रेलवे अधिकारियों को फटकार लगाई और कहा कि धारा 8(1)(जे) के तहत अस्वीकृति‘गलत और अनुचित’ थी क्योंकि यह प्रावधान ‘वर्तमान मामले में लागू नहीं होता है’। उन्होंने कहा कि उक्त धारा व्यक्तिगत जानकारी से संबंधित है।

आयोग ने पाया कि वाणिज्यिक विश्वास से संबंधित धारा 8(1)(डी) को यह प्रदर्शित किए बिना कि प्रकटीकरण किसी तीसरे पक्ष की प्रतिस्पर्धी स्थिति को कैसे नुकसान पहुंचाएगा‘यांत्रिक और अनुचित तरीके से’ लागू किया गया।

आयोग ने रेखांकित किया कि मांगी गई जानकारी अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत एक रेलवे स्टेशन पर पुनर्विकास कार्यों और सार्वजनिक धन के उपयोग से संबंधित है। उसने कहा कि इस तरह के विवरण ‘व्यापक जनहित के दायरे में पूरी तरह से आते हैं’।

आदेश में कहा गया, ‘‘आयोग इस तरह की लापरवाही और अनुचित तरीके से सूचना देने से इनकार करने को गंभीरता से लेता है, खासकर सार्वजनिक कार्यों और शासन में पारदर्शिता से जुड़े मामलों में।’’

सीआईसी ने रेलवे अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे संशोधित बिंदुवार उत्तर प्रदान करें और आरटीआई अधिनियम के अनुसार, यदि आवश्यक हो, तो व्यावसायिक रूप से संवेदनशील विवरणों को हटाकर अनुरोधित जानकारी नि:शुल्क उपलब्ध कराएं।

आयोग ने लोक सूचना अधिकारी को आगाह किया कि छूट संबंधी प्रावधानों का उपयोग करते समय उचित सावधानी बरतें और यह सुनिश्चित करें कि उचित औचित्य के बिना सूचना देने से इनकार न किया जाए, विशेष रूप से सार्वजनिक हित और सार्वजनिक जवाबदेही से जुड़े मामलों में।

भाषा धीरज रंजन

रंजन


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