खिलजी ने शीशे में देखा था रानी पद्मिनी को, राजस्थान शिक्षा बोर्ड ने हटाया ये किस्सा

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खिलजी ने शीशे में देखा था रानी पद्मिनी को, राजस्थान शिक्षा बोर्ड ने हटाया ये किस्सा

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  • Publish Date - June 23, 2018 / 09:28 AM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 08:56 PM IST

जयपुर। पिछले वर्ष फिल्म पद्मावत के कारण हुए विवाद के बाद अब राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने स्कूली किताबों में चित्तौड़गढ़ की रानी पद्मिनी से जुड़े इतिहास में बदलाव किया है। 12वीं कक्षा के इतिहास की किताब से उस किस्से को हटा दिया है, जिसमें बताया गया था कि अलाउद्दीन खिलजी ने रानी पद्मिनी को शीशे (आईने) में देखा था।

रानी पद्मिनी से जुड़ा ये किस्सा ‘मुगल आक्रमण: प्रकार और प्रभाव’ के पाठ पद्मिनी की कहानी में था। अब इसे हटा दिया गया है। इससे पहले वर्ष 2017 के पाठ्यक्रम में लिखा हुआ था कि ‘आठ वर्ष तक घेरा डालने के बाद सुल्तान जब चित्तौड़ को नहीं जीत पाया तो उसने एक प्रस्ताव रखा कि यदि उसे पद्मिनी का प्रतिबिंब ही दिखा दिया जाए तो वह दिल्ली लौट जाएगा’।

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पहले किताब में आगे लिखा गया था कि ‘राणा ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया दर्पण में पद्मिनी का प्रतिबिंब देखकर जब अलाउद्दीन वापस लौट रहा था, उस समय उसने रतन सिंह को कैद कर लिया और रिहाई के बदले में पद्मिनी की मांग की। जबकि 2018 के नए संस्करण में अब लिखा गया है कि ‘आठ वर्ष तक घेरा डालने के बाद जब सुल्तान चित्तौड़ को नहीं जीत पाया, उसने संधि प्रस्ताव के बहाने धोखे से रतन सिंह को कैद कर लिया और रिहाई के बदले में पद्मिनी की मांग की। साथ ही 2018 के नए संस्करण में एक नई लाइन भी जोड़ी गई है इसमें लिखा गया है कि पद्मिनी का विवरण साल 1540 में लिखी गई मलिक मुहम्मद जायसी के किताब पद्मावत के अनुसार है

बता दें कि पिछले साल फिल्म पद्मावतको लेकर काफी विवाद हुआ था और राजस्थान सरकार भी इस फिल्म के विरोध में थी।

वेब डेस्क, IBC24