राजस्थान उच्च न्यायालय ने सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति में हो रही देरी पर राज्य सरकार से मांगा जवाब

राजस्थान उच्च न्यायालय ने सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति में हो रही देरी पर राज्य सरकार से मांगा जवाब

राजस्थान उच्च न्यायालय ने सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति में हो रही देरी पर राज्य सरकार से मांगा जवाब
Modified Date: April 28, 2026 / 10:33 pm IST
Published Date: April 28, 2026 10:33 pm IST

जयपुर, 28 अप्रैल (भाषा) राजस्थान उच्च न्यायालय ने 2012 और 2018 की भर्ती प्रक्रियाओं के तहत सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति में हो रही देरी पर राज्य सरकार से जवाब मांगा है। यह देरी राज्यभर के 309 नगरीय निकायों को प्रभावित कर रही है।

न्यायमूर्ति रवि चिरानिया की एकलपीठ ने इंदरराज निदानिया और अन्य द्वारा दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सरकार को नोटिस जारी किया और तीन सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

अदालत ने कुछ नगर निकायों में नियुक्ति आदेश जारी करने और अन्य में प्रक्रिया लंबित रखने पर सवाल उठाए।

अदालत ने यह स्पष्ट करने को कहा कि क्यों राजाखेड़ा (धौलपुर), कोटा, राजसमंद, टोंक और चुरु में नियुक्तियां की गईं, जबकि अलवर नगर निगम में शुरू की गई प्रक्रिया को अन्य निकायों, जिनमें जयपुर नगर निगम भी शामिल है, तक नहीं बढ़ाया गया।

याचिकाकर्ताओं के वकील अभिनव शर्मा ने बताया कि राज्य में कुल स्वीकृत पदों में से 23,820 सफाई कर्मचारी पद रिक्त हैं, जो जनशक्ति की भारी कमी को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि केवल जयपुर में ही 4,077 पद पिछले 14 वर्षों से खाली हैं, जिससे राजधानी में स्वच्छता सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।

याचिकाओं में आरोप लगाया गया कि अधिकांश वाल्मीकि समुदाय से आने वाले उम्मीदवारों को समिति समीक्षा के बहाने लंबे समय तक विलंब का सामना करना पड़ा है, जबकि कुछ क्षेत्रों में चयनात्मक नियुक्तियां की गईं।

यह भी तर्क दिया गया कि 2024 में जयपुर में हुई हड़ताल के बाद शीघ्र नियुक्ति का आश्वासन देने वाले समझौते के बावजूद राज्य ने 2024–25 में भर्ती प्रक्रिया पुनः शुरू करने का प्रयास किया, जिसे बाद में वापस ले लिया गया।

याचिकाकर्ताओं ने उच्च न्यायालयों के पूर्व के निर्देशों का हवाला दिया, जिनमें 2017 के ललित कुमार मामले का आदेश शामिल है, जिसमें 2012 की भर्ती प्रक्रिया तीन माह में पूरी करने का निर्देश दिया गया था।

उन्होंने उच्चतम न्यायालय के सफाई कर्मचारी आंदोलन बनाम भारत संघ मामले के फैसले का भी उल्लेख किया, जिसमें हाथ से मैला ढोने वालों के पुनर्वास और सार्वजनिक रोजगार में प्राथमिकता पर जोर दिया गया था।

याचिकाओं में जयपुर, राजगढ़ (अलवर) और ब्यावर सहित विभिन्न नगरीय निकायों में रिक्त पदों पर 380 से अधिक याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति का निर्देश देने की मांग की गई है, ताकि उन्हें उन उम्मीदवारों के समान अवसर मिल सके जिन्हें पहले ही कुछ नगरपालिकाओं में नियुक्त किया जा चुका है।

भाषा बाकोलिया शोभना

शोभना


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