राजस्थान: ‘विक्षुब्ध’ क्षेत्रों में सम्पत्ति बेचने के लिए अनुमति अनिवार्य करने वाला विधेयक पारित
राजस्थान: 'विक्षुब्ध' क्षेत्रों में सम्पत्ति बेचने के लिए अनुमति अनिवार्य करने वाला विधेयक पारित
जयपुर, छह मार्च (भाषा) राजस्थान विधानसभा में ‘राजस्थान विक्षुब्ध क्षेत्रों (डिस्टर्ब एरिया) में स्थावर संपत्ति के अंतरण का प्रतिषेध और परिसरों से किरायेदारों को बेदखली से संरक्षण के लिए उपबंध विधेयक 2026′ शुक्रवार को ध्वनिमत से पारित किया गया। इसके कानून बनने के बाद ऐसे क्षेत्रो में संपत्ति बेचने के लिए प्रशासन से अनुमति लेनी होगी।
इससे पहले विधेयक पर हुई चर्चा के बाद संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा कि इस विधेयक में किसी हिन्दू, मुस्लिम, वर्ग विशेष, बहुसंख्यक, अल्पसंख्यक, सम्प्रदाय, समुदाय, उपासना पद्धति का उल्लेख नहीं है। उन्होंने कहा, ‘‘हमारे लिए सभी समान है। यह अधिनियम राज्य की वर्तमान परिस्थितियों, आवश्यकताओं और प्राप्त सुझावों से विधि विशेषज्ञों की राय से बनाया गया है।’’
पटेल ने सदन को विश्वास दिलाया कि इस अधिनियम के लागू होने से राज्य में भाईचारा और सामाजिक सद्भावना और अधिक मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि यह सामाजिक न्याय, सुरक्षा और संवैधानिक संतुलन का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में गंगा-जमुना तहजीब बरकरार रखने की कोशिश की जाएगी।
उन्होंने कहा, ‘‘तनाव, अस्थिरता और सामाजिक अशांति की स्थिति में यह अधिनियम सक्रिय रक्षक की भूमिका निभाएगा। यही हमारा मूल ध्येय भी है।’’
राजस्थान के संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि दंगों, सामुदायिक तनाव, साम्प्रदायिक तनाव से आबादी क्षेत्रों में जनसंख्या की संरचना तेजी से बदलती है तो सामाजिक असंतुलन और पारस्परिक अविश्वास का माहौल बनता है। उन्होंने कहा कि राज्य के कई क्षेत्रों में समुदाय विशेष की संख्या बढ़ने से जनसांख्यिकी असंतुलन, साम्प्रदायिक तनाव और सार्वजनिक सद्भाव की कमी का प्रभाव मिश्रित आबादी क्षेत्रों पर पड़ता है।
उन्होंने कहा कि देश के कई हिस्सों में साम्प्रदायिक तनाव और हिंसा की घटनाओं के आधार पर अनुभव किया गया है कि ऐसे समय में भय, असुरक्षा, सामाजिक दबाव के कारण लोग अपनी सम्पत्ति को वास्तविक मूल्य से कम दर पर बेचने को मजबूर हो जाते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘यह अधिनियम पलायन रोकेगा, सम्पत्ति का उचित विक्रय मूल्य सुनिश्चित करेगा। इसके तहत राज्य सरकार तथ्यों, रिपोर्ट, प्रशासनिक आधार व अन्य जानकारी पर आवश्यक लगने पर अधिसूचना जारी कर किसी क्षेत्र को विक्षुब्ध क्षेत्र घोषित कर सकेगी।’’
यह कानून बनने के बाद ‘विक्षुब्ध’ क्षेत्रों में सम्पत्ति विक्रय करने के लिए जिला प्रशासन के समक्ष आवेदन करना होगा। इसके बाद सक्षम प्राधिकारी द्वारा जांच की जाएगी, जिसमें आवेदक को भी सुनवाई का मौका मिलेगा। इसमें देखा जाएगा कि प्रस्तावित बेचना पूर्ण सहमति से, बिना दवाब और उचित मूल्य/डीएलसी रेट, जो भी अधिक हो पर किया जाना है।
इसके अनुसार अधिनियम में उल्लेखित सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी आदेश की अवहेलना पर तीन वर्ष से पांच वर्ष तक के कारावास का प्रावधान है। साथ ही, जुर्माने के रूप में न्यूनतम एक लाख रुपये या सम्पत्ति के उचित मूल्य का 10 प्रतिशत जो भी अधिक हो, से दंडित किया जाएगा।
इससे पहले विधेयक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस के विधायक व प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने इसकी आलोचना की और राज्य सरकार पर धार्मिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा देने और संवैधानिक अधिकारों को समाप्त करने की कोशिश का आरोप लगाया।
डोटासरा ने आरोप लगाया कि सरकार धार्मिक उन्माद फैलाकर और ऐसे विधेयक लाकर बहुसंख्यक वोटों को अपनी तरफ करके ‘गुजरात मॉडल’ यहां पर अपनाने जा रही है।
डोटासरा ने कहा, ‘‘संपत्ति खरीद बेचने के अधिकार संविधान से हमें मिले हैं। इस पर सरकार का नियंत्रण करना भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने के लिए शांत क्षेत्र को अशांत करने का षड्यंत्र है।’’
डोटासरा ने कहा कि अगर कांग्रेस सत्ता में आती है तो इस कानून को खत्म कर दिया जाएगा।
कांग्रेस विधायक राजेंद्र पारीक ने भी इस विधेयक की मंशा पर सवाल उठाया। वहीं सत्तारूढ़ पार्टी के वक्ताओं ने सदन में इस विधेयक का बचाव व समर्थन किया।
भाषा पृथ्वी
अमित
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