भाजपा सरकार में उपेक्षा का शिकार हो रहा राजस्थान का सुदृढ़ स्वास्थ्य ढांचा: अशोक गहलोत

भाजपा सरकार में उपेक्षा का शिकार हो रहा राजस्थान का सुदृढ़ स्वास्थ्य ढांचा: अशोक गहलोत

भाजपा सरकार में उपेक्षा का शिकार हो रहा राजस्थान का सुदृढ़ स्वास्थ्य ढांचा: अशोक गहलोत
Modified Date: March 23, 2026 / 01:42 pm IST
Published Date: March 23, 2026 1:42 pm IST

जयपुर, 23 मार्च (भाषा) राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोमवार को आरोप लगाया कि राज्य की मौजूदा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार के कार्यकाल में स्वास्थ्य ढांचा उपेक्षा का शिकार हो रहा है।

गहलोत ने कहा कि राज्य सरकार को बिगड़ते हालात सुधारने के लिए ध्यान देना चाहिए।

उन्होंने एक बयान में कहा, ‘‘राजस्थान का सुदृढ़ स्वास्थ्य ढांचा आज उपेक्षा का शिकार होकर दरक रहा है।’’

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘यह बेहद चिंताजनक है कि हमारी कांग्रेस सरकार द्वारा स्थापित विश्वस्तरीय ‘हेल्थ मॉडल’ को वर्तमान सरकार धराशाई कर रही है। आरजीएचएस (राजस्थान सरकार स्वास्थ्य योजना) के अंतर्गत बकाया भुगतान न होने के कारण एक बार फिर निजी अस्पतालों ने ओपीडी और दवा देने संबंधी सेवाएं रोकने की तैयारी कर ली है, जिससे कर्मचारी और पेंशनधारक अधर में हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘साथ ही, चिरंजीवी (एमएए) योजना को शिथिल कर प्रदेशभर के अस्पतालों में इलाज में देरी और आवश्यक दवाइयों की भारी किल्लत पैदा कर दी गई है।’’

गहलोत ने दावा किया कि जयपुर के सवाई मान सिंह अस्पताल और जनाना अस्पताल जैसे बड़े केंद्रों में रक्त की भारी कमी एक बड़ा ‘‘आपातकाल’’ है जो प्रदेशवासियों के ‘‘जीवन के लिए जानलेवा’’ साबित हो सकता है।

उन्होंने मांग की कि सरकार को चाहिए कि निजी ब्लड बैंक पर लगी रोक अविलंब हटाए ताकि मरीजों की समस्याओं का समाधान हो सके।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘‘चाकसू विधानसभा क्षेत्र के 108 वर्षीय बुजुर्ग गोलूराम माली ने मुझसे मिलने की इच्छा जताई जिनसे मैं कल शाम उनके गांव जाकर मिला। वहां इकट्ठा हुए ग्रामीणों ने भी चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सहित हर क्षेत्र में रोकी गई योजनाओं को लेकर भाजपा सरकार के प्रति रोष जताया।’’

गहलोत ने कहा, ‘‘जब मैं सोशल मीडिया के माध्यम से जनता की इन बुनियादी समस्याओं को उठाता हूं, तो मुख्यमंत्री समाधान निकालने के बजाय अपने कार्यक्रमों में मुझ पर व्यक्तिगत टिप्पणी करने में व्यस्त रहते हैं। उन्हें समझना चाहिए कि हम जनता की पीड़ा की आवाज बन रहे हैं, और सरकार को धरातल पर बिगड़ते हालात सुधारने पर ध्यान देना चाहिए।’’

भाषा पृथ्वी खारी

खारी


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