राजनाथ सिंह ने शिक्षित लोगों के देश-विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने पर चिंता जताई

राजनाथ सिंह ने शिक्षित लोगों के देश-विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने पर चिंता जताई

राजनाथ सिंह ने शिक्षित लोगों के देश-विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने पर चिंता जताई
Modified Date: January 2, 2026 / 06:25 pm IST
Published Date: January 2, 2026 6:25 pm IST

(फाइल फोटो के साथ)

उदयपुर, दो जनवरी (भाषा) रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को कहा कि देश में ‘व्हाइट-कॉलर टेरेरिज्म’ जैसी चिंताजनक प्रवृतियां सामने आ रही हैं जहां अत्यंत शिक्षित लोग समाज और राष्ट्र के विरुद्ध कार्य करते हैं।

उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में बहुत शिक्षित लोग भी आपराधिक गतिविधियों में लिप्त पाए जाते हैं।

 ⁠

सिंह ने दिल्ली में लाल किले के पास 10 नवंबर को हुए कार बम धमाके की ओर इशारा करते हुए यह बात कही जिसमें षडयंत्रकारी डॉक्टर थे।

वह यहां भूपाल नोबल्स यूनिवर्सिटी के स्थापना दिवस को संबोधित कर रहे थे।

सिंह ने कहा, ‘‘धर्म और नैतिकता से विहीन शिक्षा समाज के लिए उपयोगी नहीं होती है तथा कभी-कभी यह घातक भी सिद्ध हो जाती है। शायद यही कारण है और बहुत बड़ी विडंबना है कि बहुत शिक्षित लोग भी आपराधिक गतिविधियों में लिप्त पाए जाते हैं।’’

उन्होंने कहा,‘‘आज ‘व्हाइट कॉलर टेरररिज़म’ जैसी चिंताजनक प्रवृतियां देशवाशियों के सामने आ रही हैं, जहां अत्यंत शिक्षित लोग समाज और राष्ट्र के विरुद्ध कार्य करते हैं।’’

उन्होंने कहा,‘‘हाल में दिल्ली में ‘बम विस्फोट’ करने वाला कौन था? डॉक्टर थे। वरना जो डॉक्टर पर्चे पर हमेशा ‘आरएक्स’ लिखकर प्रस्रिक्प्शन लिखते हैं … उन डॉक्टरों के हाथ में ‘आरडीएक्स’ हो? इसलिए आवश्यक है कि ज्ञान के साथ साथ संस्कार भी होना चाहिए। चरित्र भी होना चाहिए।’’

केंद्रीय मंत्री का कहना था कि शिक्षा का उद्देश्य चरित्र निर्माण है। चरित्र को ‘व्यापक परिप्रेक्ष्य’ में देखा जाना चाहिए। शिक्षा का उद्देश्य केवल पेशेवर सफलता’ नहीं है बल्कि सदाचार, नैतिकता और एक मानवीय व्यक्तित्व का निर्माण भी है। यही भारतीय शिक्षा दर्शन की मूल आत्मा है। इससे समाज में समरसता एवं शांति बढ़ती है।

उन्होंने कहा, ‘‘हमारा प्रयास है कि हम भारतीय शिक्षा के मूल स्वरूप को बनाए रखते हुए उसे नए युग के साथ तालमेल बनाए रखने के लायक भी बनाएं।’’

उन्होंने कहा,‘‘प्रौद्योगिकी में बदलाव आ रहा है। उससे कृत्रिम मेधा, मशीन लर्निंग तथा अन्य तकनीकी हमारे जीवन और काम करने के तरीके को पूरी तरह से बदल रही है। हमें इनका सकारात्मक इस्तेमाल करते हुए भारत के विकास को नई गति देनी होगी।’’

उन्होंने कहा कि भारत आज ‘नॉलेज इकोनॉमी’ के रूप में उभर रहा है तथा 2014 में ‘ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स’ में भारत की रैंकिंग 76 थी जो 2024 में 39 हो गयी है, यह दूरदर्शी सुधारों के कारण हुआ है।

सिंह ने कहा कि आज भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है,‘हम 2030 तक तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की तरफ आत्मविश्वास से बढ़ रहे है।’

सिंह ने यह भी कहा कि देश में कई रक्षा ‘स्टार्टअप’ करिश्माई काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा,‘‘मैं विश्वास से कह सकता हूं कि आने वाले 15-20 साल में हमारा भारत हथियारों के मामले में पूरी तरह से आत्मनिर्भर बन जायेगा।’’

उन्होंने विद्यार्थियों में ज्ञान के साथ साथ विनय, चरित्र एवं धर्मबोध पर जोर दिया। उन्होंने कहा, ‘विद्या से व‍िनय आती है, विनय से योग्यता आती है, उससे समृद्धि, समृद्धि से धर्म और अंततः धर्म से ही सच्चा सुख मिलता है। कोई भी शिक्षा व्यवस्था जो ज्ञान के साथ विनय, चरित्र और धर्म बोध नहीं देती है उसे सफल नहीं कहा जा सकता।’’

उन्होंने कहा,‘‘मैं धर्म की बात कर रहा हूं तो उसको मंदिर में जाकर पूजा करना, मस्जिद में जाकर इबादत करना, गिरिजाघर में सजदा करना… इससे जोड़कर नहीं देखा जाना चाइये। मैं जिस धर्म की बात कर रहा है वह दायित्वबोध है, वह कर्तव्य चेतना है।’’

दस नवंबर को दिल्ली में लाल किले के बाहर कार बम विस्फोट में 15 लोग मारे गए थे। उस कार को डॉ. उमर-उन-नबी चला रहा था। जांच में एक ‘व्हाइट-कॉलर’ आतंकी मॉड्यूल का खुलासा हुआ, जिसके बाद तीन डॉक्टरों – डॉ. मुजम्मिल शकील गनई, डॉ. अदील अहमद राथर, डॉ. शाहीना सईद समेत कई लोगों को गिरफ्तार किया गया।

केंद्रीय मंत्री ने कहा,‘‘हम ऐसे समय में जी रहे है जहां ज्ञान, आंकड़े और सूचना की कमी नहीं है बल्कि विवेक की कमी है।…ज्ञान के सही उपयोग के लिए विवेक की आवश्यकता होती है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ आतंकवादी बिलकुल निरक्षर नहीं होते है। विश्वविद्यालय और महाविद्यालय की अच्छी डिग्री लेने वाले भी आतंकवादी बन जाते हैं क्योंकि विवेक का अभाव है। इसलिए विवेक आवश्यक है। जिसके पास ज्ञान के साथ विवेक होगा वह समाजकल्याण का काम करेगा। जिसके पास ज्ञान तो होगा लेकिन विवेक नहीं होगा वह समाज के लिए विनाशकारी काम करेगा।’’

उन्होंने आत्म-सम्मान और अहंकार के बीच नाजुक संतुलन को समझने के महत्व पर भी जोर दिया।

उन्होंने विद्यार्थियों से कहा, “जीवन में मन बड़ा करके रखना। छोटे मन से काम मत करना। मन को जैसे बड़ा करता जाओगे सुख उतना ही बढ़ता जायेगा।’’

उन्होंने कहा कि आज दुनिया पर्यावरण, जनस्वास्थ्य और ‘डिजिटल एथिक्स’ से जुड़ी समस्याओं का सामना कर रही है जिनका समाधान किसी एक ही ‘तरीके’ से नहीं किया जा सकता। उन्होंने सभी विधाओं के संयुक्त प्रयास से ऐसी समस्याओं का समाधान ढूंढने पर जोर दिया।

सिंह ने कहा,‘‘शोध का अंतिम लक्ष्य सिर्फ जर्नल में पब्लिश होना नहीं हो सकता, इसका लक्ष्य धरातल पर परिवर्तन लाना होना चाहिए।’’

भाषा पृथ्वी राजकुमार

राजकुमार


लेखक के बारे में