एसआईआर की आड़ में मुस्लिमों समेत वास्तविक नागरिकों को निशाना बनाया जा रहा: अरशद मदनी

एसआईआर की आड़ में मुस्लिमों समेत वास्तविक नागरिकों को निशाना बनाया जा रहा: अरशद मदनी

एसआईआर की आड़ में मुस्लिमों समेत वास्तविक नागरिकों को निशाना बनाया जा रहा: अरशद मदनी
Modified Date: July 1, 2026 / 06:41 pm IST
Published Date: July 1, 2026 6:41 pm IST

नयी दिल्ली, एक जुलाई (भाषा) जमीयत उलेमा-ए-हिंद (एएम) के प्रमुख मौलाना अरशद मदनी ने बुधवार को आरोप लगाया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की आड़ में असली नागरिकों, खासकर, मुस्लिम समुदाय के लोगों को मताधिकार से वंचित करने का प्रयास किया जा रहा है।

मौलाना मदनी ने कहा कि यदि मतदान जैसा संवैधानिक अधिकार सरकारी विवेक पर निर्भर हो जाए, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए अत्यंत खतरनाक संकेत है।

संगठन की ओर से जारी एक बयान के मुताबिक, उन्होंने कहा कि पहले भी समय-समय पर मतदाता सूचियों का पुनरीक्षण होता रहा है, लेकिन वर्तमान एसआईआर अपनी प्रकृति, कार्यप्रणाली और संभावित परिणामों के कारण पूरी तरह अलग दिखाई देता है।

उनके मुताबिक, लाखों नागरिक सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं, विभिन्न दस्तावेज जमा कर रहे हैं और मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं, फिर भी उन्हें इस बात का भरोसा नहीं है कि उनका नाम मतदाता सूची में बना रहेगा।

मौलाना मदनी ने आरोप लगाया कि ऐसा प्रतीत होता है कि एसआईआर की आड़ में वास्तविक नागरिकों को उनके मतदान के अधिकार से वंचित करने की कोशिशें की जा रही हैं और कई राज्यों में विशेष रूप से मुसलमानों को निशाना बनाया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि यह धारणा लगातार मजबूत होती जा रही है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया केवल चुनावी सूचियों में सुधार तक सीमित नहीं है, बल्कि कुछ हलकों में इसे मुस्लिम मतों के प्रभाव को कमजोर करने के एक माध्यम के रूप में भी देखा जा रहा है।

बयान के मुताबिक, उन्होंने पश्चिम बंगाल का उल्लेख करते हुए कहा, “27 लाख मतदाताओं को संदिग्ध बताना और उनके मताधिकार पर सवाल उठाना लोकतंत्र पर एक गंभीर धब्बा है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार प्रभावित लोगों में बड़ी संख्या मुसलमानों की है, जिससे पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं।”

मुस्लिम नेता ने अपील की एसआईआर के अगले चरण शुरू हो चुके हैं, इसलिए मुसलमानों सहित सभी नागरिकों को असाधारण जागरूकता, कानूनी समझ और सावधानी के साथ आगे बढ़ने की आवश्यकता है और सभी जरूरी दस्तावेज पहले से तैयार रखें तथा किसी भी प्रकार की जल्दबाजी या लापरवाही में कोई फॉर्म जमा न करें, क्योंकि छोटी-सी तकनीकी त्रुटि भी आगे चलकर गंभीर कानूनी जटिलताओं का कारण बन सकती है।

मौलाना मदनी ने कहा कि यदि एसआईआर के नाम पर किसी भी नागरिक के मतदान के अधिकार पर आघात करने का प्रयास किया गया, तो जमीयत उलेमा-ए-हिंद हर कानूनी, संवैधानिक और लोकतांत्रिक मोर्चे पर पूरी मजबूती के साथ उनके साथ खड़ी रहेगी।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती इसी में है कि प्रत्येक नागरिक का मताधिकार सुरक्षित रहे, संविधान की सर्वोच्चता कायम रहे और किसी भी भारतीय नागरिक को बिना किसी उचित कारण अपनी नागरिकता सिद्ध करने के लिए मजबूर न किया जाए।

मदनी ने विपक्षी गठबंधन ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस’ (इंडिया) के 23 घटक दलों और एक निर्दलीय राज्यसभा सदस्य ने निर्वाचन आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया तथा चुनाव से जुड़े अन्य मुद्दों पर प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत को एक साझा पत्र भेजने का भी स्वागत किया।

भाषा नोमान नोमान माधव

माधव


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